भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 103, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ेंइस्लाम और भारत ७७
"मैं इस खड्ग को उस समय तक रक्खूँगा, जब तक कि मेरा वह चचा,
जो मक्का गया है, लौट न आए।"*
सामुरी ने अपने राज में मुसलमानों को हर तरह की सहायता दी।
कोई नय्यर किसी नम्बूंतरी ब्राह्मण के बराबर में न बैठ सकता था, किन्तु
कोई भी मुसलमान बैठ सकता था। मुसलमानों का धर्मगुरु थङ्गल सामुरी
के साथ साथ पालकी में निकलता था। अरबों और मुसलमानों की मदद
से सामुरी ने अपने राज की सीमाओं को खूब बढ़ाया, और राज की समृद्धि
में बहुत बड़ी उन्नति हुई। वर्त्तमान कालीकट का नगर उस समय के एक
मुसलमान क़ाज़ी ही का बसाया हुआ है। मलबार के राजाओं की जल
सेना के सेनापति अधिकतर मुसलमान ही होते थे, जो 'अलीराजा' कहलाते
थे। इसलाम धर्म के प्रचार में भी सामुरी ने खूब सहायता दी। यहाँ तक
कि उसने आज्ञा दे दी कि हर हिन्दू मल्लाह के घर के कम से कम एक लड़के
को बचपन से मुसलमानों की तरह शिक्षा दी जाय। यही आजकल के
मोपलों की उत्पत्ति है। मोपला शब्द का अर्थ महापिल्ला यानी ज्येष्ठ
पुत्र है।†
मुसलमान फ़क़ीर और प्रचारक
इसी बीच समय समय पर असंख्य मुसलमान फ़क़ीर और विद्वान कुछ
समुद्र के रास्ते और कुछ अफ़गानिस्तान के रास्ते अरब और ईरान से आ
आकर भारत के अनेक भागों में बसते गए। हर जगह उनका खूब आदर
सत्कार होता था।
- Logan : Malabar, vol. i, p. 231.
† Innes : Malabar and Anjengo District Gazetter, p. 190.