भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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सब की अलग अलग सम्प्रदाएँ थीं। बौद्ध और जैन मतों ने मांस और
मदिरा का उपयोग एक बार बिलकुल बन्द कर दिया था, किन्तु कापालिकों
और शाक्तों दोनों के ज़रिये इन दोनों चीज़ों का उपयोग स्थान स्थान पर
फिर से धर्म का एक अङ्ग बन गया था। सारांश यह कि राजनैतिक, धार्मिक
और सामाजिक, तीनों दृष्टि से भारत उस समय अन्धकार और अराजकता
की हालत में था,—असंख्य छोटी बड़ी रियासतें, एक दूसरे की दुश्मन,
सैकड़ो मत मतान्तर, और अगणित सदाचार-विरुद्ध कुरीतियाँ और अन्ध
विश्वास !
भारत में इसलाम धर्म
ठीक उस समय, जब कि देश की यह हालत थी, इसलाम का भारत
में पदार्पण हुआ। हम लिख चुके हैं कि इसलाम के जन्म से पहले अरबों
की इस देश में ख़ासकर दक्खिन भारत में अनेक बस्तियाँ थीं। उस समय
के समस्त इतिहास से यह भी साबित है कि अरबों और भारतवासियों में
बड़ा प्रेम था, और अरब सौदागर इस देश के अन्दर आदर की दृष्टि से देखे
जाते थे। मुसलमानों के सैनिक हमले से बहुत पहले, ईसा की सातवीं सदी
से ही अरब सौदागरों के साथ साथ नए इसलाम धर्म ने भी दक्खिन की
ओर से भारत के अन्दर प्रवेश किया। इतिहास से पता चलता है कि इस
नए धर्म का भी भारतवासियों ने उसी प्रेम के साथ स्वागत किया, जिस
प्रेम के साथ वे सैकड़ों साल पहले से अरब सौदागरों का स्वागत करते रहे
थे। एक बार भारतवर्ष की सीमाओं के अन्दर प्रवेश करते ही इसलाम भी
भारत की असंख्य सम्प्रदायों में से एक गिना जाने लगा। इतिहास लेखक
रॉलैण्डसन लिखता है कि सातवीं सदी के अन्त में मुसलमान अरब