भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंइस्लाम और भारत ७५
मलबार तट पर आकर बसने लगे थे। इतिहास लेखक स्टररॉक लिखता है
कि—"सातवीं सदी से लेकर ईरानी और अरब सौदागर भारत के पश्चिमी
तट पर अलग अलग बन्दरगाहों में बड़ी बड़ी तादाद में आकर बसने लगे।
ये लोग इसी देश की स्त्रियों के साथ शादियाँ कर लेते थे। इनकी बस्तियाँ
मलबार में ख़ास तौर पर बड़ी और महत्वपूर्ण थीं, क्योंकि वहाँ पर बहुत
शुरू ज़माने से मालूम होता है राज की यह एक नीति चली आती थी कि
बन्दरगाहों में व्यापारियों को हर तरह की सुविधाएँ दी जावें।"*
धीरे धीरे दक्खिन में मुसल्मानों का प्रभाव बढ़ता गया। राज की
ओर से उन्हें तिजारत करने और ज़मीन ख़रीदने के साथ साथ अपने
नए धर्म का प्रचार करने की भी पूरी सुविधाएँ दी जाने लगीं। नवीं सदी
तक ये लोग समस्त पश्चिमी तट पर फैल गए। हम लिख चुके हैं कि भारत
में उस समय बौद्ध मत और जैन मत का हिन्दू मत और उसकी
नई सम्प्रदायों के साथ संग्राम जारी था। इन अनेक नई हिन्दू सम्प्रदायों के
मुक़ाबले में, जिनका हम ऊपर ज़िक्र कर आए हैं और जिनका ज़ोर उस
समय बढ़ता जा रहा था, इस्लाम के सीधे सादे और सरल सिद्धान्तों
और उसके अन्दर मनुष्यमात्र की समता के विचार की ओर लोगों का ध्यान
ज़ोरों के साथ आकर्षित हुआ। इस्लाम के विरुद्ध पक्षपात या उसकी ओर
द्वेष का कोई सबब उस समय तक मौजूद न था। नवीं सदी के शुरू
में ही मलबार के हिन्दू राजा चेरामन पेरूमल ने, जिसकी राजधानी
कोडङ्गलूर थी, इस्लाम मत स्वीकार कर लिया।† राजा का नाम अब्दुर-
- Sturrock: S. Kanara, Madras District Manuals; p. 180.
† Logan: Malabar, vol. i, p. 245.