भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)
Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas
सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा
DevanagariHindipublished690 पृष्ठ
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ब्रह्म जीव की एकता, कही खोल निरधार ।
ब्रह्मज्ञान सागर धरयो, ताको नाम बिचार ११
रची सरस शब्दावली, राग सहित रुचिकार ।
ज्ञान योग वैराग पुनि, प्रेम भक्ति भंडार १२
पुनि परिशिष्ट सुभाग में, दशम स्कन्धनुसार ।
श्रीकृष्ण लीला ललित, अनुपम युगल विहार १३
वानी श्रीमहाराज की, सद्ग्रन्थन को सार ।
सरस माधुरी जो पढ़ै, मिलैं पदारथ चार १४
इति ॥