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सर्वकोश
भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas

सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished690 पृष्ठ

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पृष्ठ 10

·· श्रीमन्निकुञ्जविहारिणे नमः ॥
श्रीमद्भक्तिसागरग्रन्थ की महिमा तथा
माहात्म्य के वर्णन में ॥
श्रीसरसमाधुरीजी रचित
:- कवित्त :-
ग्रन्थ भक्तिसागर उजागर सब विश्वबीच बांचत हैं जाको
कविकोविद अरु ज्ञानी हैं। साधु सन्त बुद्धिमन्त विद्वज्जन
विविधि भाँति मनन करत हिये धरत योगी यती ध्यानी हैं ॥
त्यागी वैरागी जन-पढ़त ताय चितलगाय चतुर्वर्गदायक यह
निश्चय कर जानी हैं। कहे सरसमाधुरी सुनाय सव सन्तन
को याके अर्थ समझे होत जीवनमुक्त प्रानी हैं ॥ १ ॥
अष्टादश षटरु चार चौदह अरु नव की सार ऐसी यह
अनूप श्याम चरणदास बानी हैं। भारत अरु गीता पुनि
भागवत भरी है यामें रामायण सार रसिकजननने पिछानी
हैं॥ संस्कृत भाषादिक पुस्तक बहु विश्वविदित उक्ति जुक्ति
सारी याके बीच में समानी हैं। कहे सरसमाधुरी सुनाय सव
सन्तन को एक एक बात याकी अनुभव कर प्रमानी हैं ॥ २ ॥
नाम रूप लीला धाम सेवा श्री श्यामा श्याम सवही की
सुलभरीति बानी में बखानी हैं। सन्त अरु महन्त गुणवन्त
बुद्धिवन्त सकल सर्वोपरि रहस्य रीत मानी रससानी हैं ॥
याही को गावें अरु सुनावें सव शिष्यन को या समान सुलभ
सरल और न जगजानी हैं। कहे सरसमाधुरी यह सवकी
मन हरनहार महिमा अपार अरु भक्ति मुक्ति दानी हैं ॥ ३ ॥
जलाली जमाली जिक्र सुल्तानुल अजकार फ़ना बक्रा
सिफ़्त सब ग्रन्थ में बखानी हैं। जात अरु सिफ़ात की प्रकाश