भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)
Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas
सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंॐ
श्रीराधाकृष्णाय नमः ॥
❃ श्री सरसमाधुरीजी रचित ❃
❃ सूचना दोहावली ❃
श्रीमत शुक मुनिराज वर, व्यास पुत्र भगवान ।
श्याम चरण के दासजी, जिनके शिष्य महान १
जिनकीवाणीविविधिविधि, अद्भुत अनुपम ग्रन्थ ।
नाम भक्तिसागर सरस, प्रेम परा को पन्थ २
ब्रजचरित्र तामें प्रथम, अमरलोक शुचिनाम ।
रासादिक लीला ललित, अरु महिमा निजधाम ३
कर्मकाण्ड शुभ अशुभ फल, कथन किये महाराज ।
नाम धरयो ताको प्रभू, अनुपम धर्म जहाज ४
योग युक्ति जामें भरी, सब विधि सांगोपांग ।
याहीतें याको धरयो, नाम योग अष्टांग ५
सागर योग सन्देह की, पुस्तक वरनी गूढ़ ।
गुरुमुख ज्ञानी जन बिना, अर्थ न समझें मूढ़ ६
योग स्वरोदय पुनि रच्यो, स्वर को भेद उचार ।
ताहि पढ़िकर प्रेम जो, पावे तत्व विचार ७
वेद अथर्वण की कही, पंच उपनिषद् सार ।
भाषा में वर्णन करी, योग ज्ञान निरधार ८
भक्ति पदारथ पुनि कथ्यो, श्रुति पुराण को सार ।
अगुन सगुन हरि रूपको, कियो तत्व निरधार ९
दत्तात्रेय मुनि ने किये, गुरु चौवीस उदार ।
ताकी कथा कथी भली, नाम सु गुटकासार १०