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सर्वकोश
भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas

सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished690 पृष्ठ

पृष्ठ 504, कुल 690 में से

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पृष्ठ 504

शब्दवर्णन । ४६३
सखीरी रहनी केसर घोरिये रस होरी हो ।
बहुरि न ऐसों बार सरस रस होरी हो ॥
सखीरी सतगुण करि पिचकारि ले रस होरी हो
तमरजके भर मार सरस रस होरी हो ॥
सखीरी गर्बगुलाल उड़ाइये रस होरी हो ।
मोह मटुकिया डारि सरस रस होरी हो ॥
सखीरी मिल मिल रंग लगाइये रस होरी हो ।
चंदन चरच विचार सरस रस होरी हो ॥
सखीरी निश्चल सिन्धु समाइये रस होरी हो ।
रिमझिम झमक फुहार सरस रस होरी हो ॥
सखीरी शून्य नगर में नृत्तिये रस होरी हो ।
अनहद झनक झिंगार सरस रस होरी हो ॥
सखीरी सैन सुरति सों समझिये रस होरी हो ।
सोहंब्रह्म खिलार सरस रस होरी हो ॥
सखीरी पांच पचीसौ रल मिले रस होरी हो ।
मंगल शब्द उचार सरस रस होरी हो ॥
सखीरी अलख पुरुष फगुवा लहो रस होरी हो ।
आपा आप बिसारि सरस रस होरी हो ॥
चरणदास रमइया रमि रह्यो रस होरी हो ।
दर्शो है फाग अपार सरस रस होरी हो ॥
गुरु दूती बिना सखी पीव न देखो जाय ।
भावै तुम जप तप करि देखो भावै तीरथ न्हाय ॥
पांच सखी पचीस सहेली अति चतुर अधिकाय ।
मोहिं अयानी जानिकै मेरो बालम लियो लुकाय ॥
वेद पुराण सबै जो ढूंढ़े सुरति स्मृति सब धाय ।