भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)
Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas
सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा
DevanagariHindipublished690 पृष्ठ
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१४ श्रीस्वामीचरणदासजीकाग्रन्थ ।
श्याम कहूं मैं पुकारि मेरी श्रवन* सुनि लीजिये ६४ ऊहीं हाथ
कुचगहि† पूतना के प्राण सोखे पाय ऊंची‡ पदवी निज धाम
को सिधारी है। ऊहीं हाथ श्रीधरको मुखमाड़ो दहीसेती
छातीपर पांव दै मरोरि जीभ डारी है ॥ ऊहीं हाथ कूबरी के
कूबकाड़ सीधो कियो ऊहीं हाथ मस्तक+ गज खैंचि मूठ मारी
है। ऊहीं हाथ बांह चरणदास कहै आय गहो ऊहीं हाथ
जमुना में नाथ्यो नागकारी है ॥
इति श्रीचरणदासजीकृतव्रजचरित्रसम्पूर्णम् ॥
प्रथमपाठ * श्रौन † गहि ‡ ऊंचो पद + मत्त ॥