भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)
Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas
सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा
DevanagariHindipublished690 पृष्ठ
पृष्ठ 405, कुल 690 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 405
.३६६ श्रीस्वामीचरणदासजीकाग्रन्थ ।
नेह कमान बिलुरकै खैंची मारि गये हरि तीरकी ।
भाल वियोग हिये बिच खटकै सुधिन लई या पीर की ॥
चरणदाससखिनिशिदिनतलफैंज्यों मछली बिन नीरकी।
कहैं कुछ और करें कुछ औरे आखिर जात अहीर की ॥
रेखता ॥
फ़रज़न्द नन्दजी का दिल बीच भावदाँ ।
बरपायँ खूब नूपुर सुन्दर सुहावदाँ ॥
वह सांवला सलोना महबूब यार मन ।
आहिस्ता लटक चाल मटक मेरे आँवर्दों ॥
टीका संदलका खैंचिकै माथे पै अदासों ।
बरसर बिराजै अफ़सरे हीरे जरावदाँ ॥
कुण्डल झलकते हैं दर हर दो गोश में ।
आवाज़ बांसुरीकी शीरीं बजावदाँ ॥
नीमा ज़री का गलमें कटि काछनी बनी ।
पीले दुपट्टे वाला बीड़े चबावदाँ ॥
करता है नृत्य नादर घुँघुरू कि झनकसों