भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)
Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas
सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा
DevanagariHindipublished690 पृष्ठ
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गले धुकधुकी सुन्दर झमकै । तामधिकौस्तुभमणिअतिदमकै ॥ - yes, the headline is completely unbroken!
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अधिक सुघर पहिरे हिमचौकी । वनमाला कहियत नौनिधिकी ॥ -
Line 20:
गोल भुजनपर बाजू सोहैं । पहुँची कड़ा कनक करिदोहैं ॥
Wait, look atपहुँची कड़ा कनक करिदोहैं:
Is there a space betweenकड़ाandकनक? Yes.
Wait, look atपहुँची कड़ा: is there a mark? There's a pencil underline. -
Line 21:
पहुंचीढिग पहिरे जहाँगीरी । रतन चौक छविलगीजँजीरी ॥
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पहुंचीढिगorपहुँचीढिग?
Line 20 hasपहुँचीwith chandrabindu. Line 21 hasपहुंचीwith dot (anusvara).
And it's joined:पहुंचीढिग.
Thenपहिरे जहाँगीरी ।
Then `रतन चौक छविलगीजँजी