सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas

सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished690 पृष्ठ

पृष्ठ 39, कुल 690 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 39

unbroken from ता to कै!
Wait, look at line 18:
गले धुकधुकी सुन्दर झमकै । तामधिकौस्तुभमणिअतिदमकै ॥ - yes, the headline is completely unbroken!

  • Line 19:
    अधिक सुघर पहिरे हिमचौकी । वनमाला कहियत नौनिधिकी ॥

  • Line 20:
    गोल भुजनपर बाजू सोहैं । पहुँची कड़ा कनक करिदोहैं ॥
    Wait, look at पहुँची कड़ा कनक करिदोहैं:
    Is there a space between कड़ा and कनक? Yes.
    Wait, look at पहुँची कड़ा: is there a mark? There's a pencil underline.

  • Line 21:
    पहुंचीढिग पहिरे जहाँगीरी । रतन चौक छविलगीजँजीरी ॥
    Wait, look at the first word:
    पहुंचीढिग or पहुँचीढिग?
    Line 20 has पहुँची with chandrabindu. Line 21 has पहुंची with dot (anusvara).
    And it's joined: पहुंचीढिग.
    Then पहिरे जहाँगीरी ।
    Then `रतन चौक छविलगीजँजी