सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas

सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished690 पृष्ठ

पृष्ठ 21, कुल 690 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 21

१६ श्रीस्वामीचरणदासजीकाग्रन्थ ।
ठौर ठौर सुंदर सुखद, भरे सरोवर नीर ।
कमल खिले बहु रंग के, रोचक बहत समीर ८५
बँग्ला अरु बारहदरी, बनी अनेकन और ।
तिन पर सूवा सारिका, क्रीड़त मोरी मोर ८६
मध्य महारमनीक इक, रतन जटित सुढार ।
बन्यों चौतरा अति सरस, मंडल गोलाकार ८७
चौसठ खम्भा तासु पर, जटित- जवाहर लाल ।
पचरँग चुन्नी चमकनी, बूंटा वेलि सुढाल ८८
चौंसठ खम्भा पर बनो, रंग महल रस खान ।
मणि माणिक बहुँ दिसि जड़े, जगमग जोति महान ८६
चौंसठ कलश सुहावने, ध्वज पताक धजदार ।
लहरत फहरत तड़ित सम, दमकत दुति मनहार ६०
चौंसठ खम्भा मध्य में, विछी विछायत खूब ।
नरम रेशमी गलीचा, अतिशय सरस अजूब ६१
गुलदस्ता सुंदर सजे, सुमन अनेकन रंग ।