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सर्वकोश
भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas

सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished690 पृष्ठ

पृष्ठ 14, कुल 690 में से

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पृष्ठ 14

श्रीमन्निकुंजविहारिणे नमः॥
श्रीमत् श्यामचरणदासाचार्यचरितामृत ॥
ॐ श्री सरसमाधुरीजी रचित ॐ
(दोहावली)
श्रीसतगुरु बलदेव प्रभु, चरणन शीश नवाय।
श्यामचरण के दास को, चरितामृत कहों गाय १
बैठि हिये मम श्रीगुरु, करि हैं आय सहाय।
सरस माधुरी गुरु कृपा, सबही विधि बनजाय २
सम्बत सत्रहसौ गिनो, ऊपर साठ पिछान।
प्रगटे भार्गववंश में, कृष्ण अंश प्रभु आन ३
शोभनजी के कुल विषै, अष्टम पीढ़ी अन्त।
मुरलीधर घर प्रगट भे, श्यामरूप धर सन्त ४
स्वप्न माहिं दर्शन दिये, कुंजो कों श्री श्याम।
तुमरे प्रगटूं पुत्र हो, सुनहु मातु सुखधाम ५
भादो शुक्ला तीज को, कुंजो कूख मझार।
बालनाम रणजीत धर, प्रगटे कृष्ण मुरार ६
जन्म समय अस्थान में, भयो अधिक उजियार।
अनहद धुनि बाजे बजे, छई सुगन्धि अपार ७
नाम ग्राम डहरे विषै, घर घर मंगल चार।
विविधि बधाई गुनिनमिल, गाई भली प्रकार ८
पंच वर्ष की वैसमें, सरिता तट शुकदेव।
गोदलिये रणजीत को, प्यार कियो गुरुदेव ६
गये वर्ष उन्नीस में, गंगातट शुकतार।
साक्षात् दर्शन दिये, शुक मुनि व्यास कुमार १०