भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 96, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंविश्वप्रेम
बलवन्त सिंह के छद्म नाम से लिखा गया भगतसिंह का यह लेख कलकत्ता
से प्रकाशित साप्ताहिक ‘मतवाला’ (वर्ष : 2, अंक सं. 13-14) के दो अंकों में
छपा था। इन अंकों की तारीखें क्रमशः 15 नवम्बर, 1924 एवं 22 नवम्बर, 1924
थीं। — स.
“वसुधैव कुटुम्बकम्!” जिस कवि सम्राट की यह अमूल्य कल्पना है, जिस
विश्वप्रेम के अनुभवी का यह हृदयोद्गार है, उसकी महत्ता का वर्णन करना
मनुष्य-शक्ति से सर्वथा बाहर है।
‘विश्वबन्धुता!’ इसका अर्थ मैं तो समस्त संसार में समानता (साम्यवाद,
World wide Equality in the true sense) के अतिरिक्त और कुछ नहीं समझता।
कैसा उच्च है यह विचार! सभी अपने हों। कोई भी पराया न हो। कैसा सुखमय
होगा वह समय, जब संसार से परायापन सर्वथा नष्ट हो जायेगा; जिस दिन यह
सिद्धान्त समस्त संसार में व्यावहारिक रूप में परिणत होगा, उस दिन संसार को
उन्नति के शिखर पर कह सकेंगे। जिस दिन प्रत्येक मनुष्य इस भाव को हृदयंगम
कर लेगा, उस दिन — उस दिन संसार कैसा होगा? ज़रा कल्पना करो तो!
उस दिन इतनी शक्ति होगी कि ‘शान्ति शान्ति’ की पुकार भी शान्ति भंग न
कर सकेगी। उस दिन भूख लगने पर रोटी के लिए किसी को भी चिल्ल-पों मचाने
की आवश्यकता नहीं हुआ करेगी। व्यापार उस दिन उन्नति के शिखर पर होगा,
परन्तु फ़्रांस और जर्मनी में व्यापार के नाम पर घोर युद्ध न हुआ करेंगे। उस दिन
अमेरिका और जापान दोनों होंगे, परन्तु उनमें पूर्वी और पश्चिमीपन न होगा।
काले-गोरे उस दिन भी होंगे परन्तु अमेरिकावासी वहाँ के काले निवासी (Red
Indians) को जीते-जी जला न सकेंगे। शान्ति होगी परन्तु पीनलकोड की
आवश्यकता न होगी। अंग्रेज़ भी होंगे और भारतवासी भी, परन्तु उस समय उनमें
गुलाम और शासक का भाव न होगा। उस दिन महात्मा टालस्टाय के Resist not
the evil (बुराइयों का प्रतिकार मत करो) वाले सिद्धान्त की उच्च ध्वनि न लगाने
पर भी संसार में बुराइयाँ नज़र न आयेंगी। उस समय होगी पूर्ण स्वतन्त्रता। कैसा होगा
वह समय? ज़रा कल्पना करो!
90 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़