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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 84, कुल 788 में से

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पृष्ठ 84

घर को अलविदा : पिता जी के नाम पत्र
1923 में भगतसिंह, नेशनल कॉलेज, लाहौर के विद्यार्थी थे। जन-जागरण के
लिए ड्रामा-क्लब में भी भाग लेते थे। क्रान्तिकारी अध्यापकों और साथियों से नाता
जुड़ गया था। भारत को आज़ादी कैसे मिले, इस बारे में लम्बा-चौड़ा अध्ययन और
बहसें जारी थीं।
घर में दादी जी ने अपने पोते की शादी की बात चलायी। उनके सामने अपना
तर्क न चलते देख भगतसिंह ने पिता जी के नाम यह पत्र लिखा और कानपुर में
गणेशशंकर विद्यार्थी के पास पहुँचकर 'प्रताप' में काम शुरू कर दिया। वहीं
बी.के. दत्त, शिव वर्मा, विजयकुमार सिन्हा जैसे क्रान्तिकारी साथियों से मुलाक़ात हुई।
उनका कानपुर पहुँचना क्रान्ति के रास्ते पर एक बड़ा क़दम बना। – स.
पूज्य पिता जी,
नमस्ते।
मेरी ज़िन्दगी मक़सदे-आला¹ यानी आज़ादी-ए-हिन्द के असूल² के लिए
वक्फ़³ हो चुकी है। इसलिए मेरी ज़िन्दगी में आराम और दुनियावी ख़ाहशात⁴ बायसे
कशिश⁵ नहीं हैं।
आपको याद होगा कि जब मैं छोटा था, तो बापू जी ने मेरे यज्ञोपवीत के वक़्त
एलान किया था कि मुझे ख़िदमते-वतन⁶ के लिए वक्फ़ दिया गया है। लिहाज़ा
मैं उस वक़्त की प्रतिज्ञा पूरी कर रहा हूँ।
उम्मीद है आप मुझे माफ़ फ़रमायेंगे।
आपका ताबेदार
भगतसिंह

  1. उच्च उद्देश्य 2. सिद्धान्त 3. दान 4. सांसारिक इच्छाएँ 5. आकर्षक 6. देश-सेवा
    78 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़