भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 79, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंदादा जी के नाम एक पत्र
शहीद भगतसिंह का जन्म 28 सितम्बर, 1907 को हुआ। उस समय उनके चाचा
अजीत सिंह को लाला लाजपतराय के साथ किसान-आन्दोलन का प्रतिनिधित्व करने
पर अंग्रेज़ सरकार ने माण्डले (बर्मा) में निर्वासित कर रखा था। जनता के रोष के
आगे झुकते हुए नवम्बर, 1907 में उन्हें रिहा किया गया। पिता किशन सिंह को अंग्रेज़
सरकार ने नेपाल से पकड़ा था और छोड़ दिया था। सबसे छोटे चाचा स्वर्ण सिंह
पर कई मुक़दमे बनाये गये थे, और वे जमानत पर रिहा हुए थे। इसीलिए दादी ने
भगतसिंह को ‘भागाँवाला’ (भाग्यशाली) मान लिया था।
बाबा अर्जुन सिंह ने अपने पोते का पालन-पोषण अपनी देखरेख में किया। वे
शुरू से ही उसके भीतर सामाजिक चेतना और तर्क-शक्ति के विकास के लिए
प्रयत्नशील थे, और उसे सामाजिक बराबरी और प्रगति के विचारों से परिचित करा
रहे थे। भगतसिंह की पहले चार साल की पढ़ाई अपने गाँव बंगा चक्क न. 105 गुगैरा
ब्रांच (अब लायलपुर, पाकिस्तान) में हुई और आगे पढ़ने के लिए वे पिताजी के पास
लाहौर आ गये। यह भगतसिंह का पहला ख़त है, जब वे छठी कक्षा में पढ़ रहे थे।
उनका यह पत्र दादा अर्जुन सिंह को सम्बोधित है, जो उन दिनों गाँव खटकड़ कलाँ
आये हुए थे। पत्र उर्दू में है। – स.
लाहौर, 22 जुलाई, 1918
पूज्य बाबाजी,
नमस्ते।
अर्ज़ यह है कि आपका ख़त मिला। पढ़कर दिल खुश हुआ। इम्तिहान की बाबत
यह है कि मैंने पहले इस वास्ते नहीं लिखा था क्योंकि हमें बताया नहीं गया था। अब
हमें अंग्रेज़ी और संस्कृत का नतीजा बताया गया है। उनमें मैं पास हूँ। संस्कृत में मेरे
150 नम्बरों में 110 नम्बर हैं। अंग्रेज़ी में 150 में से 68 नम्बर हैं। जो 150 में से 50
नम्बर ले जाये वह पास होता है। 68 नम्बरों को लेकर मैं अच्छी तरह पास हो गया
हूँ। किसी क़िस्म की चिन्ता न करना। बाक़ी नहीं बताया गया। छुट्टियाँ, 8 अगस्त
को पहली छुट्टी होगी। आप कब आयेंगे, लिखना।
आपका ताबेदार
भगतसिंह
यह जीवन देश को समर्पित : भगतसिंह के छह शुरुआती पत्र / 73