भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 748, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंगये। उन्हें फाँसी का दण्ड सुना दिया गया। परन्तु आप वहीं से रफूचक्कर हो गये।
बाद में पेड़ीमोर को पकड़कर फाँसी पर लटका दिया गया। हालाँकि वे उस दिन
वहाँ थे ही नहीं। वे एक बड़े वीर सैनिक थे।
उस दिन सरकार ने प्रतिहिंसा के भाव से प्रेरित होकर दो बड़े भीषण और क्रूर
कार्य कर डाले। सायंकाल के समय पुलिस ने ‘कार्क पार्क’ को घेर लिया। उस
समय वहाँ 10,000 व्यक्ति फुटबाल का मैच देख रहे थे। उन पर पुलिस ने गोलियों
की वर्षा कर अपनी बर्बरता, क्षुद्रता तथा नृशंसता का परिचय देने में कुछ कसर
उठा न रखी। 17 व्यक्ति परलोक सिधार गये, 50 बुरी तरह घायल हुए।
दूसरा अत्यन्त वेदनाजनक समाचार था श्री पीडरक्लैंसी तथा डिक मैक की
हत्या का। उन्हें पकड़कर और यह दोष बताकर कि उन्होंने फ्रेंच पार्क के पहरेदारों
पर आक्रमण किया था, तड़पा-तड़पाकर मार डाला गया। इस अभियोग के प्रत्युत्तर
में केवल इतना कहना ही पर्याप्त होगा कि उन स्वेच्छा-सेवकों के बारे में –
जिन्होंने कि अपने रणचातुर्य से अंग्रेजों को नाकों चने चबवाये थे, बिना अन्य
साथियों को लिए फ्रेंच पार्क के प्रहरियों पर आक्रमण करने की बात कहना सर्वदा
हास्यास्पद है। जो भी हो, पुलिस उन वीरों से जली बैठी थी। अवसर पाते ही उसने
अपनी प्रतिहिंसा की भभकती हुई आग को शान्त करने के लिए उन पर मनमाने
अत्याचार कर उन्हें मार डाला।
बेचारे पीडर और डिक! दोनों कैसे साहसी वीर, कितने मृदुल, कितने कट्टर
देशभक्त और कैसे सुचतुर सेनापति थे! उन्हें श्री ट्रीसी की तरह दो-दो हाथ दिखाने
तक का सुअवसर न मिल सका! अफ़सोस!!
बारहवाँ परिच्छेद
ज़िला इंस्पेक्टर की हत्या और मेरा विवाह
मैं खूब स्वस्थ होकर टिप्रेरी लौट आया। इस समय युद्ध ने खूब ज़ोर पकड़ लिया
था। रणचण्डी का ताण्डव नृत्य हो रहा था। देशभर में खूब चहल-पहल थी।
आयरिश लोग बड़े हर्ष और चाव से अपने आदर्श के लिए, अपने देश के लिए,
अपनी मातृभूमि के लिए प्राणोत्सर्ग कर रहे थे। मानो आयरिश जाति स्वतन्त्रता देवी
के मन्दिर में निज रक्त मांस की भेंट से उस देवी को प्रसन्न करने का दृढ़ निश्चय
कर वहीं डट गयी थी।
अंग्रेज़ी न्यायालय एकदम ख़ाली हो गये थे। ‘मृत्युदण्ड’ घोषित किये रहने पर
भी प्रजातान्त्रिक न्यायालय खचाखच भरे रहते थे। देशवासियों का झुकाव प्रजातन्त्र
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