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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 738, कुल 788 में से

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पृष्ठ 738

में हुई। उन्होंने वहाँ के सारे शस्त्र तथा बारूद आदि छीन लिए। तीसरा आक्रमण
लैण्डर्स की चौकी पर हुआ। यहाँ पर तीन सिपाही घायल हो गये और चौकी जला
दी गयी। एक बार सीनमैलोन नायक थे।
इधर हमने टिप्रेरी पहुँचकर यही कार्य शुरू कर दिया। एक बार तो रातभर
लड़ाई होती रही। हम सड़कों पर बड़े-बड़े वृक्ष काट कर डाल देते, ताकि सैनिक
लारियाँ धड़ाधड़ न चल पायें। टेलीफ़ोन आदि के तार काट डालते, मकान के
आमने-सामने जहाँ कहीं स्थान मिलता, बैठकर छोटी मोटी खान में बारूद भर कर
उसे एकाएक उड़ा देते और फिर उन लोगों को आत्मसमर्पण करने का आदेश देते।
उपरोक्त घटना के समय पुलिस वाले भी डट गये। उन्होंने आज्ञा का पालन नहीं
किया। खूब लड़ाई हुई। आख़िर उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया। उन्हें 'मार्च' की
आज्ञा दे बाहर निकाला। उनके शस्त्रादि छीन लिए और उन्हें छोड़ दिया। उस समय
प्रातःकाल हो चुका था।
यह 4 जून 1920 की घटना है। ठीक उसी दिन कैपव्हाइट पर भी आक्रमण
हुआ था। इन सब आक्रमणों में हमारे 30-40 व्यक्ति हुआ करते थे। हमारे तीनों
आक्रमणों में किसी भी व्यक्ति को कोई घाव नहीं लगा था। इन्हीं दिनों, 27 जून
1920 के दिन सीन मैलोन महाशय ने किलमैलौक पुलिस स्टेशन पर जोकि नगर
के ठीक मध्य में स्थापित था, आक्रमण कर दिया, खूब लड़ाई हुई, मकान में आग
लगा दी गयी। परन्तु आक्रमणकारियों में से श्री स्कल्ली मारे गये। अतः युद्ध रोक
देना पड़ा। विपक्षी दल के 2 मरे, 6 घायल हुए और जो 2 आत्मसमर्पण की मन्त्रणा
देने के अपराध में एक कमरे में बन्द किये गये थे, वे वहीं जल मरे।
आयरिश-स्वेच्छा-सेवक संघ के एक प्रमुख कार्यकर्ता बॉब बार्टन राजद्रोह के
अपराध में दस वर्ष के लिए कारागार में बन्द कर दिये गये। सरकार का एकदम
ऐसा अनुचित व्यवहार देखकर निश्चय किया गया कि ब्रिगेड जनरल लूकस को
पकड़ लिया जाये। वे उन दिनों फर्माय में मछलियों का शिकार खेलने गये हुए थे।
उन्हें तथा उनके दो साथियों को लिंच महोदय कैद कर लाये। वे लोग मोटर में
बैठे-बैठे अरबी भाषा में बातचीत करने लगे। इसका सारांश तो कुछ मिनट बाद
स्वतः ही स्पष्ट हो गया, जब उन्होंने एकदम आक्रमण कर दिया। उनमें से एक
व्यक्ति घायल हो गया। लूकस को तो लिंच महोदय साथ ले आये, परन्तु शेष दोनों
को उन्होंने फर्माय की पुलिस चौकी में पहुँचा दिया। परिणामस्वरूप सरकार ने
फर्माय नगर को जला डाला। जो भी हो, लूकस महाशय को क़ैद रखा गया। वे
एक वीर सैनिक थे। उनके साथ बहुत सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार किया जाता रहा। इस
बात को बाद में उन्होंने भी स्वीकार किया। उन्हें पूर्व लिम्मर्क के एक मकान में
कैद किया गया। वहीं से वे 29 जुलाई को भाग निकले।
732 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़