भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 736, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंतथा बालकों की हत्याएँ, आयरिश महिलाओं की लांछना — यह सब बातें तो अभी
तक नहीं हुई थीं। मैं यह सब क्यों कहता हूँ, केवल इसलिए कि सरकार ने जब
अपने इन आरम्भ के ही अत्याचारों का उल्लेख तक न किया था, तो बाद को ये
सब अत्याचार प्रदोष का घण्टा बजने पर पुलिस की गोलियों की बौछार से नित्य
बीसों स्त्री-पुरुषों को सदा सर्वदा के लिए अनन्त निद्रा में सुला देना आदि...लोगों
के सामने कैसे आ सकता है?
1920 की वसन्त ऋतु में, मैं उस अति सुन्दर तथा रमणीक ग्रेन्थम स्ट्रीट के
घर को छोड़ तारा पर्वत के पास ‘रायलमीथ’ में जा रहा। यह ऐतिहासिक स्थान
है, वहाँ पर रहते हुए आयरलैण्ड के उज्ज्वल भूत तथा भविष्य के न जाने क्या क्या
विचार मेरे दिल में आ-आकर मुझे रोमांचित कर गये। 1099 के विद्रोही वीर भी
इसी स्थान पर धराशायी होकर वीरगति को प्राप्त हुए थे। वहीं पर झुककर न जाने
कितनी बार हमने यह प्रार्थना की “उनकी इच्छा, उत्कटेच्छा — जिसके लिए
उन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था आज हमारे ही युग में पूर्ण हो जाये।”
यहाँ पर हमारा बहुत से मित्रों से परिचय हुआ।
कुछ दिन बाद अकर्मण्यता चुभने लगी, उधर कार्क लार्डमेयर श्री टायरमैक
कर्टन घर से सोये हुए परिवार के सामने पुलिस द्वारा मार दिये गये। और भी
बहुत-सी ऐसी ही अत्याचारपूर्ण हत्याएँ हुईं। तुरन्त डबलिन पहुँचा। सभी मित्रों से
मन्त्रणा की ओर फिर मैं तथा श्री ट्रीसी साइकिल ले टिप्रेरी को चल दिये। उस
दिन वहाँ 12 मास के पश्चात प्रवेश किया था। 1920 के ईस्टर सप्ताह में श्री
राबिन्सन तथा मैंने, डबलिन में ईस्टर के उत्सव में सम्मिलित होने का दृढ़ निश्चय
कर लिया। श्री विनसैण्ट के साथ हम भी मोटरों में बैठकर उधर चल दिये। 1916
के विद्रोह के बाद से अंग्रेज़ी सेना इन दिनों में विशेष तैयारी करती, नगर से
कई-कई मील बाहर तक मोर्चेबन्दी की जाती तथा प्रत्येक आने जाने वाली मोटर
की तलाशी ली जाती। परन्तु हमें इस बात का ध्यान ही न था। हाइड हॉल ट्राम्बे
टरमिनस के पास पहुँचने पर एक मोड़ पर मुड़ते ही हमारी एक सैनिक लारी से
भेंट हो गयी। वे हमारी तलाशी लेने के लिए रुक गये। परन्तु हमारी भोली आकृति
से प्रभावित होकर सैनिकों के अध्यक्षों ने हमारी तलाशी लिए बिना ही, सैनिकों को
चलने की आज्ञा दे दी। हम बहुत प्रसन्न हुए। खूब जी खोलकर हँस ही रहे थे कि
‘ठहरो’ का शब्द सुनकर चौंक पड़े। क्या देखा, मोर्चा-सा बना हुआ है और क़रीब
20 सैनिक रायफ़लें लिये वहाँ खड़े हैं। हँसी तो गयी ही, साथ ही अब विपत्ति की
आशंका से कुछ घबराये भी। खैर! सामने से एक अफ़सर हाथ में रिवाल्वर लिए
आगे बढ़ा और उसने कहा कि मुझे आपकी मोटर की तलाशी लेनी है। मैंने अत्यन्त
सहज भाव से कहा, आप निःसंकोच ही तलाशी ले लीजिये परन्तु हमें ज़रा जल्दी
है। कार्य बहुत ज़रूरी है किंचित मात्र की देरी होने से हमारी भारी हानि हो सकती
730 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़