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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 735, कुल 788 में से

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से घेरे खड़े रहे। वह वीर, धीर और निर्भीक सैनिक सर्वथा इस सब सम्मान का
पात्र था।
संवाद-पत्रों में अपने आक्रमण सम्बन्धी विवरण पढ़कर हमें बहुत हँसी आती।
लिखा था, सैनिकों ने लारियों में सवार होकर आक्रमणकारियों का पीछा किया।
परन्तु उसी समय मेरे सामने फोनिक्स पार्क की ओर भाग जाने वाले सैनिकों का
चित्र खिंच गया। अगर सशस्त्र सैनिकों ने मोटरों में बैठकर हमारा पीछा किया होता,
तो हम बच कैसे जाते?
बाद में मुझे डबलिन के दक्षिण भाग में श्रीमती मैलोन के घर भेज दिया गया,
इनसे पहले से भी हमारा परिचय था। उनका एक पुत्र 1916 के विद्रोह में मारा
गया था। वहाँ पर मेरी चिकित्सा ख़ूब अच्छी तरह हुई। इसके कुछ ही दिन पहले
उनकी बड़ी लड़की ब्रिघिड मैलोन से मैंने हँसी में कहा था, कि अगर मैं घायल
हो गया, तो सुश्रूषा का भार आप ही पर पड़ेगा, सो सच ही निकला। उनका सहवास
मेरे लिए अत्यन्त सुखकर था और इससे मेरे घाव भी शीघ्र ही ठीक हो गये। इस
सहवास से ही श्रीमती ब्रिघिड मैलोन से मेरा प्रेम हो गया था और डेढ़ वर्ष बाद
हमारा विवाह भी उनसे ही हुआ। वह घटना किसी प्रकार की औपन्यासिक
रोमांचकारी घटनाओं से कम नहीं। उसका विवरण हम फिर लिखेंगे।
1920 के प्रारम्भ में 1919 की घटनाओं का सिंहावलोकन करने का मुझे ख़ूब
अवसर मिल गया। सोलोहैडबेग की घटना के बाद अपराधों, हत्याओं आदि की
संख्या उत्तरोत्तर बढ़ने लगी। कई स्थानों पर उनके शस्त्र छीन लिए गये थे। सरकारी
रिपोर्ट में यह घटनाएँ ख़ास ज़ोरदार शब्दों में लिखी गयी थीं। परन्तु हमारा तो जी
चाहता था कि आगामी वर्ष में इन 'अपराधों' की संख्या बहुत बढ़ चढ़ जाये।
सरकार ने इनका वर्णन करते हुए अपने अत्याचारों की ओर निर्देश मात्र भी न करने
में बहुत बुद्धिमता का परिचय दिया था। आयरिश प्रजातन्त्र को गैर-क़ानूनी घोषित
कर देना, स्त्रियों तथा बालकों के संघों को ख़िलाफ़-क़ानून क़रार देना,
स्वेच्छा-सेवक संघ को तहस-नहस करने का पूर्ण प्रयत्न करना, उसके लिए
मामूली बातें थीं। श्री आर्थर ग्रिफिथ ने तो लिखा है कि 'समस्त आयरिश जाति'
गैर-क़ानूनी घोषित कर दी गयी थी। अभी (उस समय) तो सरकार ने रात्रि के
घण्टे¹ (Curfew) नहीं लटकाये थे, अभी तो उसने बिस्तरों में सोये हुए निर्दोष
व्यक्तियों को मार डालने का उद्योग भी शुरू नहीं किया था। गाँव के गाँव जला
देना, भागने का प्रयत्न करने के अपराध में कैदियों को गोली से मार देना, पादरियों

  1. इस घण्टे के बजने के बाद अपने घर से निकलने की सख्त मुमानियत रहती है और
    निकलने वाले अमूमन पुलिस की गोलियों के शिकार होते हैं।
    आयरिश स्वतन्त्रता-संग्राम / 729