भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 733, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंसातवाँ परिच्छेद
वायसराय बाल-बाल बच गया
जिस दुकान या सराय पर पहले आकर बैठे थे, वहीं पर श्री सैबेज का सिर रखकर
हम लोगों ने सांग्रामिक मन्त्रणा की। हम बड़े हर्ष और चाव से अपनी सफलता की
आलोचना कर रहे थे, यह सोचकर कि सैनिक लारी वायसराय महोदय का शव
मात्र ही ले जा पायी है, हम फूल उठते। ख़ैर! शेष नौ साथियों को किंचित मात्र
खरोंच तक नहीं आयी। केवल मैं ही बुरी तरह घायल हो गया था। मेरे घाव से रक्त
की धारा बह रही थी। अपने वीर साथी के शव पर अन्तिम प्रार्थना पढ़कर, हम
लोग अपनी-अपनी साइकिलों पर डबलिन नगर की ओर चल दिये। अभी कुछ
अधिक दूर नहीं गये थे कि सीमस राबिन्सन की साइकिल ख़राब हो गयी। वे झट
कूदकर श्री ट्रीसी के पीछे जा खड़े हुए, परन्तु दो को लेकर चलना कितना कठिन
है, और इस स्थिति में कितना हानिकारक, यह कोई भी अनुमान कर सकता है।
परन्तु यह असुविधा अधिक देर तक नहीं रही। सामने से एक महाशय अपनी
साइकिल लिए पैदल चले आ रहे थे। सांग्रामिक नियमों और कर्त्तव्यों तथा शान्ति
परिस्थितियों के नियमों के कर्त्तव्यों में बहुत अन्तर होता है। इसी विश्वास के कारण
झट राबिन्सन महोदय ने अपनी पिस्तौल के बल पर साइकिल माँग ली, जो तुरन्त
मिल गयी। परन्तु उन महाशय से यह भी कह दिया गया कि वे संध्या समय ग्रैशम
होटल के द्वार पर पड़ी हुई अपनी इस साइकिल को ले आवें।
नगर में हम शान्तिपूर्वक पहुँच गये। फिब्स बीरी सड़क पर स्थित श्रीमती
टूमी (Tomei) के घर पर ठहराया गया। मेरे रक्त के छींटों के चिह्न से पुलिस
नगर तक तो आ गयी, परन्तु फिर उसे आगे कुछ पता न चल पाया, यहाँ पर
अच्छे-अच्छे डॉक्टर लोग मेरा इलाज करने लगे। श्रीमती टूमी का व्यवहार बहुत
ही प्रशंसनीय था।
उसी दिन सायंकाल नगरभर में हो-हल्ला मच गया। अख़बार बेचने वालों ने
इतना कोलाहल मचाया कि बस तौबा भली। मैंने सुना, वे चिल्ला रहे थे, 'लॉर्ड
लेफ़्टीनेण्ट पर भीषण आक्रमण! एक्स टाऊन पर भयंकर युद्ध!! एक आक्रमणकारी
की मृत्यु!!!' परन्तु यह क्या? वह तो यह भी कह रहा है – 'लॉर्ड महोदय साफ़
बच निकले?' निश्चय ही हमारा सब प्रयत्न निष्फल हो गया। आज ही पहली बार
लॉर्ड महोदय दूसरी मोटर पर न बैठकर, पहली मोटर में चढ़ बैठे थे। आह। तभी
तो...! जिस गाड़ी को भयभीत कर भगा देने में ही हम सन्तुष्ट हो गये थे, वही हमारे
उद्देश्य की अपूर्णता-उद्योग की निष्फलता का कारण हो गयी। यह समाचार हमारे
लिए वज्रपात से कुछ कम न था। मेरे घावों की पीड़ा बहुत बढ़ गयी। मुझे बहुत
आयरिश स्वतन्त्रता-संग्राम / 727