भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 712, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंज़बरदस्ती की जाने वाली भरती के विरोध में हम युद्ध की तैयारियाँ करने
लगे। उधर स्त्रियों तथा बालकों के भी संघ स्थापित हो गये, जो हर समय हमें
सहायता देने को तैयार रहते थे। हमने नक़ली लड़ाइयाँ लड़नी भी शुरू कर दीं।
हमने कई बार टिप्रेरी नगर पर आक्रमण करने तथा उसकी रक्षा करने का अभिनय
किया और फिर कई सड़कों तथा बाज़ारों को फ़ौजी क्षेत्र (Military Area) घोषित
कर दिया, जहाँ पर कि अंग्रेज़ों के जाने का भी निषेध कर दिया जाता था। ऐसे
अवसरों पर हम रायफ़लें आदि नहीं ले जाते थे क्योंकि उनके छिन जाने की
आशंका थी। परन्तु मेरे जैसे कई व्यक्ति विशेष कारणों से अपना रिवाल्वर हर समय
अपने पास रखते थे। सरकार को अपनी बात पर व्यवहार करने का साहस ही न
हुआ और धीरे-धीरे उसका यह विचार ढीला होने लगा। उसके इस विचार के ढीला
होते ही हमारा संगठन भी ढीला होने लगा। वे लोग, जो युद्ध क्षेत्र की भीषणता तथा
मोर्चों की भयंकरता से त्रस्त हो उठे थे, और वहाँ से बचने मात्र के विचार से ही
हमारे संघ में आ मिले थे, अब हमें छोड़कर चलते बने। पीछे थोड़े ही व्यक्ति बच
रहे परन्तु वे बड़े दृढ़ थे।
उधर बेचारे सीन ट्रीसी डन्डल्क जेल में अनशन का मज़ा लूट रहे थे। पर
हमारी दयालु सरकार को उनकी किंचित मात्र भी चिन्ता न हुई। हम समझ गये कि
सरकार उन्हें भूखों मरने देना चाहती है। हमें शीघ्र ही कुछ न कुछ करने की
आवश्यकता महसूस हुई। मुझे बड़ी दूर की सूझी। क्यों न एक सिपाही को धर
पकड़ें और उसे अनशन व्रत का मज़ा उठाने को विवश करें? सभी साथियों ने मेरे
दिमाग़ की खूब दाद दी और इसे क्रियात्मक रूप देने की चिन्ता करने लगे परन्तु
आयरिश प्रजातन्त्र भ्रातृमण्डल (Irish Republican Brotherhood) के लोगों ने
हमारी योजना को सफल न होने दिया। हमने भी उनसे अपना सम्बन्ध तोड़ लिया।
जुलाई 1918 में ट्रीसी छूट आये। प्रजा तथा संगठन के सम्बन्ध में इस बार वे
बड़ी-बड़ी योजनाएँ सोचकर आये। परन्तु मुझे प्रचार तथा संगठन का पूरा अनुभव
हो चुका था। मैं इन शुष्क कार्यों में सिर फोड़ने की बजाय युद्ध छेड़ने की चिन्ता
में था। मैंने अपना यह मन्तव्य उसके सामने रखा। पर उन्होंने ज़िद की और इस
कारण हम अपने ही मतानुसार अलग कार्य करने लगे।
दूसरा परिच्छेद
विद्रोह-भवन (कुटी)
श्री सीन ट्रीसी अपने संगठन कार्य में जुट गये और मैंने श्री पैट्रिकक्योह के साथ
बम फ़ैक्टरी बना ली। हम दोनों में आवश्यक तथा अनावश्यक बातों पर खींचातानी
706 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़