भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 68, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंभगतसिंह ने 19 अक्टूबर, 1929 को पंजाब स्टूडेण्ट्स की कांग्रेस के नाम एक
सन्देश भेजा था जिसमें उन्होंने कहा था – “आज हम नौजवानों को बम और
पिस्तौल अपनाने के लिए नहीं कह सकते।...इन्हें औद्योगिक क्षेत्रों की गन्दी बस्तियों
में और गाँवों के टूटे-फूटे झोंपड़ों में रहने वाले करोड़ों लोगों को जगाना है।”
2 फ़रवरी, 1931 को उन्होंने ‘युवा राजनीतिक कार्यकर्ताओं के नाम’ एक
अपील लिखी थी जिसमें उन्होंने जनसाधारण के बीच काम करने के महत्त्व को
बारम्बार रेखांकित किया था। उन्होंने कहा था, “गाँवों और कारख़ानों में किसान और
मज़दूर ही असली क्रान्तिकारी सैनिक हैं।”
इसी अपील में भगतसिंह ने बलपूर्वक इस बात से इन्कार किया था कि वे
आतंकवादी हैं। उनका कहना था, “मैंने एक आतंकवादी की तरह काम किया है।
लेकिन मैं आतंकवादी नहीं हूँ। मैं तो ऐसा क्रान्तिकारी हूँ जिसके पास एक लम्बा
कार्यक्रम और उसके बारे में सुनिश्चित विचार होते हैं। मैं पूरी ताक़त के साथ बताना
चाहता हूँ कि मैं आतंकवादी नहीं हूँ और कभी था भी नहीं, कदाचित उन कुछ
दिनों को छोड़कर जब मैं अपने क्रान्तिकारी जीवन की शुरुआत कर रहा था। मुझे
विश्वास है कि हम ऐसे तरीक़ों से कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकते हैं।” उन्होंने
नौजवान राजनीतिक कार्यकर्ताओं को सलाह दी कि वे मार्क्स और लेनिन का
अध्ययन करें, उनकी शिक्षा को अपना मार्गदर्शक बनायें, जनता के बीच जायें,
मज़दूरों, किसानों और शिक्षित मध्यवर्गीय नौजवानों के बीच काम करें, उन्हें
राजनीतिक दृष्टि से शिक्षित करें, उनमें वर्ग-चेतना उत्पन्न करें, उन्हें यूनियनों में
संगठित करें, आदि। उन्होंने नवयुवकों से यह भी कहा कि यह सारा काम तब तक
सम्भव नहीं है जब तक जनता की एक अपनी पार्टी न हो। वे किस तरह की पार्टी
चाहते थे इसका खुलासा करते हुए उन्होंने लिखा था, “हमें पेशेवर क्रान्तिकारियों
की ज़रूरत है – यह शब्द लेनिन को बहुत प्रिय था – पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं
की, जिनकी क्रान्ति के सिवा और कोई आकांक्षा न हो, और न जीवन का कोई
दूसरा लक्ष्य हो। ऐसे कार्यकर्ता जितनी बड़ी संख्या में एक पार्टी के रूप में संगठित
होंगे, उतनी ही तुम्हारी सफलता की सम्भावनाएँ बढ़ जायेंगी।”
उन्होंने आगे कहा :
“व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ने के लिए आपको जिसकी सबसे अधिक
आवश्यकता है, वह है एक पार्टी जिसके पास जिस टाइप के कार्यकर्ताओं का ऊपर
ज़िक्र किया जा चुका है वैसे कार्यकर्ता हों – ऐसे कार्यकर्ता जिनके दिमाग़ साफ़
हों और समस्याओं की तीखी पकड़ हो और पहल करने और तुरन्त फ़ैसला लेने
की क्षमता हो। इस पार्टी का अनुशासन बहुत कठोर होगा और यह ज़रूरी नहीं है
कि वह भूमिगत पार्टी हो, बल्कि भूमिगत नहीं होनी चाहिए...पार्टी को अपने काम
की शुरुआत अवाम के बीच प्रचार से करनी चाहिए। किसानों और मज़दूरों को
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