भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 668, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंपेरिस की निहत्थी भीड़ ने बास्तीय पर धावा बोल दिया, बास्तीय का पतन हो गया।
14 जुलाई 1789
वर्साई¹ :
5 अक्टूबर 1789 — हज़ारों स्त्री-पुरुष राष्ट्रीय प्रतीक के प्रति अंगरक्षक सेना
द्वारा किये गये गुस्ताख़ी भरे व्यवहार का बदला लेने के लिए वर्साई की ओर कूच
कर गये। इसे वर्साई अभियान के नाम से जाना जाता है। उसके बाद घटी घटनाओं
के फलस्वरूप राजा को पेरिस लाया गया।
पृष्ठ 188 (123)
प्रत्येक राष्ट्र का विवेक जब जाग जाता है, तो वह अपने सभी उद्देश्यों के लिए
पर्याप्त सिद्ध होता है। (पृष्ठ 112, राइट्स ऑफ़ मैन)²
चूँकि हर काल में सरकार का स्वरूप पूरी तरह से राष्ट्र की इच्छा का ही
मामला रहा है, यानी कि अगर उसने राजतन्त्रात्मक स्वरूप चुना, तो ऐसा करने का
उसे अधिकार था; और उसके बाद अगर उसने गणतान्त्रिक होना पसन्द किया, तो
उसका अधिकार था कि वह गणतान्त्रिक हो, और राजा से यह कहे कि "अब
तुम्हारे लिए हमारे पास कोई गुंजाइश नहीं है।"
हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में, मन्त्री अर्ल ऑफ़ सेलबोर्न³
पृष्ठ 189 (124)
राजा :
यदि कहीं कोई ऐसा आदमी हो जो अन्य सबसे लोकोत्तर रूप में इतना अधिक
बुद्धिमान हो कि राष्ट्र के संचालन के लिए उसकी बुद्धि ज़रूरी हो, तब तो राजशाही
का कुछ औचित्य माना जा सकता है, लेकिन जब हम किसी देश पर नज़र दौड़ाते
हैं और देखते हैं कि कैसे उसका हरेक हिस्सा अपने मामलों की सूझबूझ रखता
- वर्साई : पेरिस से कुछ दूर स्थित वर्साई के महलों में राजा और उसके मन्त्रियों का
ठिकाना था जहाँ से वे सेना के सहारे क्रान्ति को दबाने की कोशिश कर रहे थे। 5 अक्टूबर
1789 को हज़ारों लोगों ने वर्साई पर धावा बोला और राजा लुई चौदहवें, रानी मैरी
अन्तोयनेत तथा उनके अमले को बन्दी बनाकर पेरिस ले आये। - टॉमस पेन की रचना राइट्स ऑफ़ मैन से (देखें पृष्ठ 14 (11) का सन्दर्भ 3)
- प्रथम अर्ल ऑफ़ सेल्बोर्न राउन्डेल पामर (1812-1895) या उसका पुत्र द्वितीय अर्ल
ऑफ़ सेल्बोर्न विलियम वाल्डग्रेव पामर (1859-1942)। दोनों ही ब्रिटिश संसद के सदस्य
थे।
पेन और सेल्बोर्न के उद्धरण मोटे अक्षरों में पेज पर तिरछे लिखे हुए हैं।
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