भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 639, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंनहीं ले पायेंगे। इसी तरह, अपनी शक्तियों का महज विस्तार भी पर्याप्त नहीं है,
क्योंकि यदि हमारी इच्छाएँ भी बढ़ जायें, तब तो हम और अधिक दुखी ही हो
जायेंगे। सच्चा सुख तो अपनी इच्छाओं और अपनी शक्तियों के बीच के अन्तर को
घटाते जाने में निहित है।
– 44 एमिली
पृष्ठ 120 (93)
“बुर्जुआ क्रान्ति का जन्म अपनी पूर्ववर्ती शासन-व्यवस्था में पहले से मौजूद
परिस्थिति से होता है।
“बुर्जुआ क्रान्ति आमतौर पर सत्ता पर क़ब्ज़े के साथ ही ख़त्म हो जाती है।
लेकिन सर्वहारा क्रान्ति के लिए सत्ता पर क़ब्ज़ा तो महज एक शुरुआतभर है, सत्ता,
जब क़ब्ज़े में आ जाती है, तब वह पुरानी अर्थव्यवस्था के रूपान्तरण और एक नयी
अर्थव्यवस्था के संगठन के लिए एक उत्तोलक के रूप में इस्तेमाल की जाती है।”
पृष्ठ 20¹
“अभी भी दो भारी-भरकम और अत्यन्त दुष्कर कार्यभार बाक़ी हैं – (एक
देश – यानी रूस – में मौजूदा शासन-व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के बाद भी)।
“सबसे पहला कार्यभार है आन्तरिक संगठन।
“दूसरी महत्त्वपूर्ण समस्या विश्व क्रान्ति की... – अन्तरराष्ट्रीय समस्याओं को
हल करने की, विश्व क्रान्ति को आगे बढ़ाने की है (जिसके हल किये बिना
कम्युनिस्ट शासन-व्यवस्था अन्तरराष्ट्रीय पूँजीवाद के ख़तरे के विरुद्ध सुरक्षित नहीं
रह सकती। )
पृष्ठ 21-22²
पृष्ठ 121 (94)
- यदि सर्वहारा को आबादी के बहुमत को अपने पक्ष में करना है तो उसके
लिए सबसे पहले ज़रूरी है कि वह बुर्जुआ वर्ग को उखाड़ फेंके और राज्य सत्ता
पर क़ब्ज़ा करे। - दूसरे, उसे पुराने राज्य उपकरण को तोड़कर सोवियत सत्ता स्थापित करना,
और एक झटके में उस प्रभाव को ख़त्म कर देना ज़रूरी है, जिसे बुर्जुआ वर्ग और - और 2. लेनिन की रचनाओं से उद्धृत अंश
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 633