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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 587, कुल 788 में से

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पृष्ठ 587

पृष्ठ 28 (25 )
जन्मसिद्ध अधिकार :
हम बेटे हैं उन पितरों के जिन्होंने मात दी थी
तख़्तो-ताज और पुरोहितों¹ के अत्याचार को;
उन्होंने दी थी चुनौती मैदाने-जंग में और फाँसी के तख़्ते से
अपने जन्मसिद्ध अधिकार के लिए – हम भी यही करेंगे!
(टी. कैम्पबेल)²
———o———
लक्ष्य की महिमा :
अरे! बेकार की नफ़रत के लिए नहीं,
न सम्मान के लिए, न ही अपनी शाबासी के लिए
बल्कि लक्ष्य की महिमा के लिए,
किया जो तुमने, भुलाया नहीं जायेगा।
(आर्थर क्लॉग)³
———o———
आत्मा की अमरता :
यदि तुम्हें कभी एक ऐसा आदमी मिल जाये जो अमरता में विश्वास रखता
हो, तो बस समझ लो कि अब तुम्हारी कोई भी कामना शेष नहीं रह जायेगी; तुम
उसकी सारी की सारी चीज़ें ले सकते हो – अगर तुम चाहो तो जीते-जी उसकी
खाल उतार सकते हो – और वह इसे एकदम खुशी-खुशी उतार लेने देगा।
(अपटन सिंक्लेयर 403) सी.जी.
———o———
खुदाई अत्याचारी
एक अत्याचारी शासक के लिए ज़रूरी है कि वह ज़ाहिरा तौर पर धर्म में
असाधारण आस्था दिखाये। जनता एक ऐसे शासक के दुर्व्यवहार के प्रति कम सचेत

  1. अंग्रेज़ी में शब्द स्पष्ट नहीं
  2. टॉमस कैम्पबेल (1777-1844) : स्कॉट कवि के गीत मैन ऑफ़ इंग्लैण्ड की अन्तिम
    पंक्तियाँ। नोटबुक के पिछले संस्करणों में त्रुटिवश ‘टी’ को ‘जे’ पढ़ा जाने के कारण इनका
    परिचय आइरिश कवि जोज़ेफ़ कैम्पबेल के रूप में दिया गया था।
  3. आर्थर ह्यू क्लो (1819-61) : अंग्रेज़ कवि की कविता पेस्चिएरा की पंक्तियाँ। जिसमें
    इटली के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के दौरान पेस्चिएरा नामक स्थान पर 1848 में हुई लड़ाई
    का वर्णन है।
    शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 581