सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 585, कुल 788 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 585

मौत के जबड़ों के भीतर,
नर्क के मुँह के भीतर,
बढ़ चले छः सौ वीर।
चमकाते सब नंगी तलवारें,
हवा में जब उनको लहराते
काटते जाते तोपचियों को,
हमला करते सेना पर, जबकि
सारी दुनिया चकराती,
<u>पृष्ठ 27 (24)</u>
पिल पड़े तोप के धुएँ में
बढ़ चले तोड़कर मोर्चा
कज़्ज़ाक और रूसी सिपाही
खाकर तलवार की चोटें
छिन्न-भिन्न हो जाते।
तोपें उनके दायें बाजू,
तोपें उनके बायें बाजू,
तोपें उनके पीछे से,
दगतीं और गरजतीं,
गोलाबारी की आँधी में,
भले गिरे अश्व और नायक
फिर भी वे इतना अच्छा जूझे
कि होकर मौत के जबड़ों से
लौटे वे नर्क के मुँह से,
जो भी थे बचे रह गये
छः सौ में से बचे रह गये।
कब हो सकता धूमिल उनका यश?
अरे वह उनकी विकट चढ़ाई!
सारी दुनिया चकराती।
आदर, उस हमले को
आदर, लाइट ब्रिगेड को!
श्रेष्ठ छः सौ वीरों को।
— लॉर्ड टेनीसन¹


  1. लॉर्ड अल्फ्रेड टेनीसन (1809-1897) : प्रसिद्ध अंग्रेज़ राष्ट्रवादी कवि
    शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 579