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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 575, कुल 788 में से

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पृष्ठ 575

पृष्ठ 16 (13)
राजा की एक व्यक्ति के भरण-पोषण के लिए, किसी देश के
तनख़्वाह : सार्वजनिक टैक्सों में से, दस लाख स्टर्लिंग सालाना देने
की बात करना अमानवीय है, जबकि हज़ारों लोग जो इसमें
योगदान करने के लिए मजबूर किये जाते हैं, अभाव से त्रस्त और बदहाली से जूझ
रहे हैं। सरकार जेलों और राजमहलों के बीच, या कंगाली और शान-शौक़त
के बीच किसी समझौते के रूप में नहीं होती; यह इसलिए नहीं गठित की जाती
कि ज़रूरतमन्द से उसकी दमड़ी भी लूट ली जाये और ख़स्ताहालों की दुर्दशा और
बढ़ा दी जाये।
— (पृष्ठ 204)¹
“मुझे आज़ादी दो या मौत”
“...मामले को हलका बनाना बेकार है, महाशय। शरीफ लोग शान्ति, शान्ति
चिल्ला सकते हैं – लेकिन कोई शान्ति नहीं है। युद्ध तो वास्तव में शुरू ही हो
चुका है। अब अगला झंझावात जो उत्तर से उठकर...हमारे कानों तक पहुँच रहा है,
गुंजायमान हथियारों की टकराहटों का है। हमारे बन्धु-बान्धव तो पहले ही से लड़ाई
के मैदान में हैं। हम यहाँ बेकार क्यों खड़े हैं? आख़िर शरीफ लोग चाहते क्या हैं?
वे क्या करेंगे? क्या जीवन इतना प्यारा या शान्ति इतनी मीठी है कि उसे बेड़ियों
और गुलामी की क़ीमत पर भी ख़रीद लिया जाये?
रोको इसे, हे सर्वशक्तिमान ईश्वर। मैं नहीं जानता कि और लोग कौन-सा रास्ता
अख़्तियार करेंगे। लेकिन जहाँ तक मेरी बात है, मुझे “आज़ादी” दो या “मौत”।
— पैट्रिक हेनरी²
मज़दूर का अधिकार :
‘जो कोई भी कठिन श्रम से कोई चीज़ पैदा करता है उसे यह बताने के लिए
किसी खुदाई पैग़ाम की ज़रूरत नहीं कि पैदा की गयी चीज़ पर उसी का अधिकार
है।”
— राबर्ट जी. इंगरसोल³

  1. वही
  2. पैट्रिक हेनरी (1736-1790) : अमेरिकी स्वतन्त्रता संग्राम के नेताओं में से एक, प्रखर
    वक्ता और सांसद
  3. रॉबर्ट जी. इंगरसोल (1832-1899) : अमेरिकी वकील, वक्ता और लेखक
    शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 569