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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 555, कुल 788 में से

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पृष्ठ 555

प्रस्तावना
भगतसिंह की जेल नोटबुक
जो शहादत के तिरसठ वर्षों बाद छप सकी
आलोक रंजन
रूसी विद्वान एल.वी. मित्रोखिन वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने 1981 में प्रकाशित
अपनी पुस्तक 'Lenin and India' में पहली बार, एक अलग अध्याय में, भगतसिंह
की दुर्लभ जेल नोटबुक से विस्तृत हवाले देते हुए उनके द्वारा अन्तिम दिनों में किये
गये क्रान्तिकारी और मार्क्सवादी साहित्य के गहन अध्ययन पर प्रकाश डाला था
और उन योजक-सूत्रों को संयोजित करने की कोशिश की थी, जो भगतसिंह के
चिन्तन के संघटक अवयव थे।
भगतसिंह और उनके साथियों ने 1928 में ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट
रिपब्लिकन एसोसिएशन' की स्थापना के समय ही समाजवाद को लक्ष्य और
सिद्धान्त के रूप में स्वीकार कर लिया था, पर कमोबेश 1929 के मध्य तक
समाजवाद और मार्क्सवाद के प्रति उनका लगाव भावात्मक ही था, बुद्धिसंगत नहीं।
भगतसिंह के सहयोगी क्रान्तिकारी शिववर्मा सहित अनेक इतिहासकारों ने इस बात
का उल्लेख किया है कि 1929 में गिरफ़्तारी के बाद एच.एस.आर.ए. के युवा
क्रान्तिकारियों के एक धड़े ने, और विशेषकर भगतसिंह ने जेल में बड़ी मुश्किलों
से जुटाकर, क्रान्तिकारी साहित्य और मार्क्सवाद का गहन अध्ययन और उस पर
विचार-विमर्श किया। इसके परिणामस्वरूप वे अराजकतावादी और मध्यवर्गीय
दुस्साहसवाद को छोड़कर तेज़ी से सर्वहारा क्रान्ति के मार्क्सवादी सिद्धान्तों को
अपनाने की दिशा में आगे बढ़े। वैयक्तिक शौर्य एवं बलिदान से जनता को जगाने
और आतंकवादी रणनीति द्वारा उपनिवेशवाद के विरुद्ध संघर्ष का रास्ता छोड़कर
उन्होंने अपने अतीत की आलोचना व समाहार किया तथा इस बात पर बल दिया
कि क्रान्ति की मुख्य शक्ति मज़दूर और किसान हैं, साम्राज्यवाद को केवल सर्वहारा
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 549