भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 543, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंपरिशिष्ट : आठ
एक दुर्लभ दस्तावेज़
श्रीमान जी,
मुझे 29 मई 1927 को भारतीय दण्ड विधान की धारा 302 के अन्तर्गत
गिरफ़्तार किया गया और पाँच सप्ताह तक पुलिस हिरासत में बन्द रखा गया। मुझे
4 जुलाई 1927 को जमानत पर छोड़ा गया। तब से मुझे कभी भी पुलिस द्वारा या
किसी भी अदालत द्वारा इस धारा के अन्तर्गत मुक़दमे का सामना करने के लिए
नहीं बुलाया गया, अतः मैं मान रहा हूँ कि आपकी छानबीन पूरी हो गयी है और
मेरे ख़िलाफ़ कुछ नहीं मिला है और व्यवहारतः आपने केस वापिस ले लिया है।
इन परिस्थितियों में मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि मेरी गिरफ़्तारी के समय मेरे
शरीर से बरामद सभी वस्तुएँ कृपया लौटा दें। मुझे सूचित करें कि इस उद्देश्य के
लिए मैं आपसे कब और कहाँ मिलूँ। जल्द अनुग्रह का बहुत आभार होगा।
आपका इत्यादि
भगतसिंह के मुक़दमे में इस पत्र को विशेष अदालत के जज जे. कोल्डस्ट्रीम
के समक्ष प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया गया। मूल ख़त व भगतसिंह के पिता
सरदार किशन सिंह का लेटरहेड अंग्रेज़ी में है। पत्र टाइप किया हुआ है जिसमें
एक-दो शब्द हाथ से लिखे गये हैं। यह पत्र एस. आई. सादिक़ अली शाह के 2
मई, 1929 के दस्तख़त के बाद अदालत में प्रस्तुत किया गया जिसे पढ़कर लाहौर
षड्यन्त्र केस की फ़ाइल से जोड़ा गया। – स.
परिशिष्ट / 537