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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 537, कुल 788 में से

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पृष्ठ 537

वर्ग-रुचि उनका पीछा नहीं छोड़ती, क्योंकि वह बहुत ज़बरदस्त ताक़त है और
उसने समाजी आन्दोलन में बड़ा भारी असर दिखाया है। इतिहास में अधिकतर चीजें
जिस तरह नज़र आती हैं, असल में उस तरह की नहीं होतीं। मजलसी वर्ग-रुचि
को समझने वाला फिलासफर काम करने वाले की अपेक्षा उसकी वर्ग-रुचि को
अच्छी तरह समझ और समझा सकता है।
मैं यह लेख केवल इसलिए लिख रहा हूँ कि किसान और मज़दूर ही हमारे
प्यार के हक़दार हैं। अंग्रेज़ी अदब से परिचित लोग कार्लाइल के प्रसिद्ध उसूल को
कई बार पढ़ चुके होंगे कि "मैं केवल दो ही आदमियों की इज़्ज़त और उनसे
मुहब्बत करता हूँ, किसी तीसरे की नहीं।" मैं एक क़दम और आगे बढ़ता हूँ और
कहता हूँ कि मैं केवल एक आदमी को ही प्यार और इज़्ज़त की निगाह से देखता
हूँ, किसी दूसरे को नहीं और वह है ग़रीब मज़दूर (किरती), जो दुनिया की दौलत
पैदा करता है।
पिछले तीस सालों से जो (आन्दोलनात्मक) लहरें हिन्दुस्तान में उठ रही हैं,
उनको निम्नलिखित तीन हिस्सों में बाँटा जा सकता है -

  1. राजनीतिक, 2. शैक्षिक, 3. धार्मिक।
    अब मैं यह दिखाना चाहता हूँ कि इन आन्दोलनों का फ़ायदा उच्च वर्ग के
    लोगों को ही हुआ है। ग़रीबों को इससे कोई लाभ नहीं पहुँचा।
  2. राजनीतिक लहरों ने अलग-अलग सूरतें पकड़ीं। इनमें समाजवादी और
    अतिवादी दोनों तरह के आदमी हैं। शान्तिमय रहकर सत्याग्रह करने वाले लोग भी
    पैदा हो गये और भयानक समय लाने वाले ख़तरनाक इन्क़लाबी लोग भी हो गये।
    इस शोर-शराबे में एक बात साफ़ है और वह यह कि इनके परिणामों से जनता
    को कोई भी लाभ नहीं हुआ। इण्डियन नेशनल कांग्रेस (हिन्दुस्तानभर की
    कांग्रेस) मध्यम वर्ग के लोगों की एक ख़ासी और अच्छी पार्टी (जमात) है।
    उसकी माँगें भी दरमियाने दर्जे के लोगों के लिए ही हैं। कांग्रेस कभी भी अपना
    कार्यक्रम मज़दूरों और किसानों के साथ मिलकर तैयार नहीं कर सकी। क्योंकि
    इसमें ग्रेजुएट, वकील, प्रोफ़ेसर, व्यापारी लोग ही शामिल हुए, इसलिए कांग्रेस का
    कार्यक्रम भी उनकी मर्ज़ी के अनुसार ही बना। एक आन्दोलन एक समय में
    अमीर-ग़रीब दोनों वर्गों के लाभ के लिए काम नहीं कर सकता, यह दुनिया की
    कुछ बड़ी अनहोनी बातों में से एक है। कांग्रेस की माँग है कि इसे हिन्दुस्तान में
    ख़ास हिस्सा मिलना चाहिए। यह हिस्सा किस तरह मिलेगा? जिन बातों की
    कांग्रेस की ओर से माँग की जा रही है वह किसके लिए पूरी होंगी? अगर
    सरकारे-हिन्द की नौकरियाँ हिन्दुस्तानियों को मिलनी हैं तो उन्हें कौन लोग प्राप्त
    करेंगे? यह तो पक्का है कि मज़दूर-किसान लोग उन नौकरियों को प्राप्त नहीं
    कर सकेंगे। कुछेक हिन्दुस्तानियों को 'इण्डियन सिविल सर्विस' में ओहदे मिल
    परिशिष्ट / 531