भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 509, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंभारतीय जन-नेताओं को अभी भी इस घातक रहस्य की जानकारी नहीं या
फिर वे जानबूझकर मूर्ख बने हुए हैं।
भारत के समझदार लोगों का कहना है कि इस बात की आशा पालना बेतुका
है कि भारत को हथियारों की ताक़त से आज़ाद कराया जा सकता है, हालाँकि वे
यह भूल जाते हैं कि यह मान लेना उतना ही या उससे भी ज़्यादा बेतुका है कि
मुट्ठीभर अंग्रेज़ों ने हथियारों के दम पर समूची मानव जाति के पाँचवें हिस्से को
अपने अधीन बनाकर रखा है। आगे आने वाली पीढ़ी बहुत सम्भव है कि इस तथ्य
की प्रामाणिकता पर सन्देह करे कि मुट्ठीभर अंग्रेज़ों ने भारत के ऊपर एक शताब्दी
तक शासन भी किया है; यह बात इतनी तो अकल्पनीय है।
आतंकवाद और अराजकतावाद के बारे में कुछ शब्द और। आज ये शब्द भारत
में सर्वाधिक क्षतिकारक भूमिका अदा कर रहे हैं। इन शब्दों को निरपवाद रूप से
क्रान्ति का सन्दर्भ आने पर ग़लत ढंग से प्रयुक्त किया जाता है क्योंकि इन नामों
की आड़ में क्रान्तिकारियों की भर्त्सना करना बहुत सुविधाजनक होता है। भारतीय
क्रान्तिकारी न तो आतंकवादी हैं और न ही अराजकतावादी। इस देश में अराजकता
फैलाना कभी भी उनका उद्देश्य नहीं रहा है और यही कारण है कि उन्हें कभी भी
अराजकतावादी नहीं कहा जा सकता। आतंकवाद कभी भी उनका लक्ष्य नहीं रहा
और उन्हें आतंकवादी नहीं कहा जा सकता। वे यह नहीं मानते कि अकेला
आतंकवाद ही आज़ादी दिला सकता है और वे आतंकवाद के लिए आतंकवाद नहीं
चाहते, हालाँकि यह सम्भव है कि वे समय-समय पर प्रतिकार के बहुत ही प्रभावी
साधन के रूप में इस तरीक़े को काम में ले आयें। मौजूदा सरकार का अस्तित्व
सिर्फ़ इसलिए क़ायम है कि विदेशी लोग भारतीय जनता को आतंकित करने में
सफल रहे हैं। भारतीय जनता अपने अंग्रेज़ मालिकों से प्रेम नहीं करती, वह नहीं
चाहती है कि वे यहाँ बने रहें, लेकिन वह अंग्रेज़ों के साथ सहयोग सिर्फ़ इसलिए
करती है कि वह उनसे बुरी तरह से डरी हुई है और यही वह डर है जोकि भारतीयों
को क्रान्तिकारियों के साथ सहयोग करने से रोकता है, ऐसा नहीं है कि वे उन्हें
प्यार नहीं करते।
सरकारी आतंकवाद का जवाब प्रति आतंकवाद से दिया जाना तय है। हमारे
समाज के प्रत्येक संस्तर में पूरी तरह से बेचारगी की भावना व्याप्त है और समाज
में समुचित जज़्बे की बहाली के लिए आतंकवाद प्रभावी उपाय है, जिसके बग़ैर
प्रगति मुश्किल होगी। इसके अलावा अंग्रेज़ मालिकों और उनके किराये के टट्टुओं
को कभी भी निर्बाध ढंग से मनमानी करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। उनके
रास्ते में हरसम्भव कठिनाई और प्रतिरोध खड़ा करना होगा। आतंकवाद का
अन्तरराष्ट्रीय प्रभाव भी होता है, क्योंकि इंग्लैण्ड के उत्कट शत्रु आतंकवाद और
क्रान्तिकारी प्रदर्शनों के जरिये फ़ौरन भारत की ओर उन्मुख होते हैं, और क्रान्तिकारी
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