सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 508, कुल 788 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 508

उपायों के जरिये हासिल की जा सकती है जहाँ पर कि किसी संविधान का
अस्तित्व ही नहीं है। यह कहना आत्मप्रवंचना है कि भारत की राजनीतिक स्वतन्त्रता
को शान्तिपूर्ण एवं वैध तरीक़ों से हासिल किया जा सकता है। जब दुश्मन अपनी
सुविधा के अनुसार शान्ति को भंग कर देने के लिए कटिबद्ध है तो “वैध” की
सुन्दर उक्ति उस समय अपना समस्त आकर्षण और महत्त्व गँवा बैठती है जब हम
अपने से हर क़ीमत पर शान्ति बनाये रखने की प्रतिज्ञा करते हैं।
हमारे जन-नेता दो-टूक शब्दों में यह कहने में हिचकिचाते हैं कि भारत
विदेशी नियन्त्रण से मुक्त पूर्ण स्वायत्तता चाहता है। सम्भवतः वे इस तथ्य से
अनजान हैं कि महान आदर्शों की प्रेरणा के जरिये राष्ट्र जन्म लेते हैं। यह
आत्मिक आदर्श को, जोकि पूर्ण स्वायत्तता की भावना को स्वीकार करने से
हिचकिचाता है, शायद ही आत्मिक कहा जा सकता हो; हालाँकि बहुत सम्भव है
कि एक नज़र में वे बेहद उदात्त जान पड़े। अब समय आ गया है कि
बेलाग-लपेट ढंग से सच कहा जाये और राष्ट्र के सम्मुख ऐसे आदर्श रखे जायें
जिन्हें वास्तव में आदर्श कहा जा सकता है।
हमारा आदर्श संगठित तरीक़े से मानवता की सेवा करना है। भारत इस आदर्श
को मूर्त रूप प्रदान नहीं कर सकता क्योंकि वह बन्धन या गुलामी की अवस्था में
बना हुआ है। भारत के ब्रिटिश भारत बने रहने तक इस आदर्श को कदापि प्राप्त
नहीं किया जा सकता। भारत अपने आदर्श को मूर्त रूप दे सके इसके लिए उसका
पृथक और स्वतन्त्र अस्तित्व बहुत ज़रूरी है। इस स्वतन्त्रता को कभी भी शान्तिपूर्ण
एवं संवैधानिक तरीक़ों से हासिल नहीं किया जा सकता। कोई बच्चा भी इस बात
को समझ सकता है कि ब्रिटिश भारत का शासन चलाने वाले क़ानून भारतीयों द्वारा
नहीं बनाये जाते और न ही उनके ऊपर उनका कोई नियन्त्रण ही हो सकता है।
ब्रिटिश भारत को कभी भी ब्रिटिश क़ानून और संविधान के जरिये कभी भी युक्त
प्रान्तों के संघीय गणतन्त्र में रूपान्तरित नहीं किया जा सकता। भारत के युवाओं,
अपने भ्रमों को दूर भगाओ और मज़बूत हृदय से वास्तविकता का सामना करो और
संघर्ष कठिनाइयों एवं कुर्बानियों से बचो नहीं। जो होना है वह होकर रहेगा। अब
और गुमराह नहीं होना है। आप शान्तिपूर्ण एवं वैध तरीक़े से शान्ति हासिल नहीं
कर सकते। महान अंग्रेज़ लेखक श्री रॉबर्ट्सन ये स्मरणीय शब्द भारत के बुद्धिमान
लोगों को और भी ज़्यादा समझदार बनाने का काम कर सकते हैं :
“सुधार का आन्दोलन और कार्यक्रम मुख्यतया आयरिश और प्रोटेस्टेण्ट नेताओं
की उपलब्धि था; जिनके आगे ब्रिटिश वक्तव्य ने यह घातक रहस्य उजागर किया
कि इंग्लैण्ड को धकियाया तो जा सकता है लेकिन उसे तर्क व विवेक से न्याय
एवं उदारता के पक्ष में नहीं खड़ा किया जा सकता” इंग्लिश अण्डर हैनोवेरियंस,
पृष्ठ 197)।
502 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़