भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 50, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंगतिविधियों से पैदा हो सकने वाली हर स्थिति से निपटने को तैयार थे। ग़दर के
नेताओं और कार्यकर्ताओं की इस अगोपनीयता की बहुत बड़ी क़ीमत पार्टी को
चुकानी पड़ी।
दूसरी प्रमुख कमज़ोरी उनका यह भ्रामक विश्वास था कि एक साम्राज्यवादी
शक्ति उनको दूसरी साम्राज्यवादी शक्ति के चंगुल से आज़ाद कराने में ईमानदारी के
साथ सहायता करेगी। उनके दिमाग़ में यह बात साफ़ नहीं थी कि जर्मन हो या
ब्रिटिश या कोई और – सभी साम्राज्यवादी शक्तियों की प्रवृत्ति एक जैसी होती है।
जब पहला विश्वयुद्ध आरम्भ हुआ तब ग़दर पार्टी और दूसरे क्रान्तिकारियों ने नारा
दिया कि “ब्रिटेन की मुसीबत हमारे लिए सुनहरा अवसर है,” और कि “दुश्मन
का दुश्मन दोस्त होता है”। इस विश्वास के साथ उन्होंने जर्मनी के क़ैसर से
सहायता के लिए सम्पर्क किया। क़ैसर के प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान
स्वाधीन भारत की भावी व्यवस्था से सम्बन्धित कुछ शर्तें भी उन्होंने रखने की
कोशिश की। मगर इस नुक्ते पर क़ैसर का जवाब हमेशा अस्पष्ट रहा। उसकी
दिलचस्पी जंग के दौरान ब्रिटेन के ख़िलाफ़ ग़दर पार्टी के क्रान्तिकारियों का अधिक
से अधिक इस्तेमाल कर सकने तक ही सीमित थी। उसके अपने जंगी उद्देश्य थे –
ब्रिटेन और फ्रांस से अधिक से अधिक उपनिवेश छीनना। इस तरह ग़दर के
क्रान्तिकारी साम्राज्यवाद की वास्तविक प्रकृति से एकदम अनजान थे। वास्तविक
और स्थायी मुक्ति के लिए गुलाम देशों को पूरी साम्राज्यवादी व्यवस्था से लड़ाई
लड़नी होगी। – यह बात रूस में अक्टूबर (नई प्रणाली में नवम्बर) 1917 की
क्रान्ति के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हुई।
महान अक्टूबर क्रान्ति और उसका प्रभाव
1917 की अक्टूबर समाजवादी क्रान्ति मानवता के इतिहास में एक युगान्तकारी
घटना है। उसने केवल रूस में ही साम्राज्यवाद को पराजित नहीं किया बल्कि पूरी
साम्राज्यवादी व्यवस्था को भी एक ज़बरदस्त झटका दिया। इस क्रान्ति ने रूस में
मनुष्य द्वारा मनुष्य के और राष्ट्र द्वारा राष्ट्र के शोषण पर आधारित व्यवस्था को
समाप्त कर दिया। सोवियत जनता अपने भाग्य की स्वामी बन गयी। खेतों, कारख़ानों
और वर्कशॉपों पर उसका सामूहिक स्वामित्व क़ायम हो गया। अक्टूबर क्रान्ति ने
न सिर्फ़ रूस के अवाम को पूँजीपतियों और ज़मींदारों की गुलामी से मुक्त किया
बल्कि एक बिल्कुल नये समाज और नये इन्सान को भी जन्म दिया। उसने गुलाम
देशों के स्वाधीनता सेनानियों को प्रेरित किया और उनके अन्दर विश्वास जगाया कि
उनकी लड़ाई कामयाब होकर रहेगी। उसने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे
मुक्ति-संघर्षों को नये आयाम भी दिये।
विश्वव्यापी साम्राज्यवाद-विरोधी संग्राम का अंग होने के नाते भारत का
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