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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 494, कुल 788 में से

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पृष्ठ 494

होने की ज़रूरत है और न ही यह सरल है। ज़रूरत है निरन्तर संघर्ष करने, कष्ट
सहने और कुर्बानी भरा जीवन बिताने की। अपना व्यक्तिवाद पहले ख़त्म करो।
व्यक्तिगत सुख के सपने उतारकर एक ओर रख दो और फिर काम शुरू करो।
इंच-इंच कर आप आगे बढ़ेंगे। इसके लिए हिम्मत, दृढ़ता और बहुत मज़बूत इरादे
की ज़रूरत है। कितने ही भारी कष्ट कठिनाइयाँ क्यों न हों, आपकी हिम्मत न
काँपे। कोई भी पराजय या धोखा आपका दिल न तोड़ सके। कितने भी कष्ट
क्यों न आयें, आपका क्रान्तिकारी जोश ठण्डा न पड़े। कष्ट सहने और कुर्बानी
करने के सिद्धान्त से आप सफलता हासिल करेंगे और ये व्यक्तिगत सफलताएँ
क्रान्ति की अमूल्य सम्पत्ति होंगी।
इन्क़लाब-ज़िन्दाबाद!
2 फ़रवरी, 1931
हमारे लिए सुनहरा अवसर
भारत की स्वतन्त्रता अब शायद दूर का स्वप्न नहीं रहा। घटनाएँ बड़ी तेज़ी से घट
रही हैं इसलिए स्वतन्त्रता अब हमारी आशाओं से भी जल्द ही एक सच्चाई बन
जायेगी। ब्रिटिश साम्राज्य बुरी तरह लताड़ा हुआ है। जर्मनी को मुँह की खानी पड़
रही है, फ्रांस थर-थर काँप रहा है और अमेरिका हिला हुआ है और इन सबकी
कठिनाइयाँ हमारे लिए सुनहरा अवसर है। प्रत्येक चीज़ उस महान भविष्यवाणी की
ओर संकेत कर रही है, जिसके अनुसार समाज का पूँजीवादी ढाँचा नष्ट होना अटल
है। कूटनीतिज्ञ लोग स्वयं को बचाने के लिए प्रयत्नशील हो सकते हैं और पूँजीवादी
षड्यन्त्र से 'क्रान्ति के बाघ' को अपने घर से दूर रखने की कोशिशें कर सकते
हैं। अंग्रेज़ों का बजट सन्तुलित हो सकता है और मृत्यु के मुँह में पड़े पूँजीवाद को
कुछ पलों की राहत मिल सकती है। 'डालर राजा' चाहे अपना ताज सँभाल लें तो
भी व्यापक मन्दी यदि जारी रही और जिसका जारी रहना लाज़िमी है, तो बेरोज़गारों
की फ़ौज तेज़ी से बढ़ेगी और यह बढ़ भी रही है, क्योंकि पूँजीवादी उत्पादन-
व्यवस्था ही ऐसी है। यह चक्कर पूँजीवादी व्यवस्था को पटरी से उतार देगा। बस,
बात कुछ महीनों की ही है। इसीलिए क्रान्ति अब भविष्यवाणी या सम्भावना नहीं,
वरन 'व्यावहारिक राजनीति' है जिसे सोची-समझी योजना और कठोर अमल से
सफल बनाया जा सकता है। इसके विभिन्न पहलुओं और तात्पर्य, इसके तरीक़ों और
उद्देश्यों-सम्बन्धी कोई विचारधारात्मक उलझन नहीं होनी चाहिए।
गाँधीवाद
कांग्रेस आन्दोलन की सम्भावनाओं, पराजयों और उपलब्धियों के बारे में हमें किसी
प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिए। आज चल रहे इस आन्दोलन को गाँधीवाद कहना
488 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़