भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 489, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंअधिकार मिलना चाहिए। अब तो सिर्फ़ यह देख सकते हैं कि मताधिकार किस
सीमा तक दिये जाते हैं।
जहाँ तक व्यवस्था का प्रश्न है, अभी दो सभाओं वाली सरकार है। मेरे ख़याल
में उच्च सभा बुर्जुआ भ्रमजाल या बहकावे के अतिरिक्त कुछ नहीं। मेरी समझ से
जहाँ तक उम्मीद की जा सके, एक सभा वाली सरकार अच्छी है।
यहाँ मैं प्रान्तीय स्वायत्तता के बारे में कुछ कहना चाहता हूँ। जो कुछ मैंने सुना
है, उसके आधार पर मैं यह कह सकता हूँ कि ऊपर से थोपा हुआ गवर्नर, जिसके
पास असेम्बली से ऊपर विशेष अधिकार होंगे, तानाशाह से कम सिद्ध नहीं होगा।
हम इसे प्रान्तीय स्वायत्तता न कहकर प्रान्तीय अत्याचार कहें। राज्य की संस्थाओं
का यह अजीब लोकतन्त्रीकरण है।
तीसरी बात तो बिल्कुल स्पष्ट है। पिछले दो साल से अंग्रेज़ राजनीतिज्ञ उस
वायदे को मिटाने में लगे हैं, जिसे मोण्टेग्यू ने यह कहकर रद्द कर दिया था कि
जब तक अंग्रेज़ी ख़ज़ाने में दम है, प्रत्येक दस वर्ष पर और सुधार किये जाते रहेंगे।
हम देख सकते हैं कि उन्होंने भविष्य के लिए क्या फ़ैसला किया है। मैं यह
बात स्पष्ट कर दूँ कि हम इन बातों का विश्लेषण इसलिए नहीं कर रहे कि
उपलब्धियों पर जश्न मनाये जायें, वरन इसलिए कि जनता में जागृति लायी जा सके
और उन्हें आने वाले संघर्षों के लिए तैयार किया जा सके। हमारे लिए समझौता घुटने
टेकना नहीं है, बल्कि एक क़दम बढ़ना और फिर कुछ आराम करना है।
लेकिन इसके साथ ही हमें यह भी समझ लेना चाहिए कि समझौता इससे
अधिक कुछ और है भी नहीं। यह अन्तिम लक्ष्य और अन्तिम विश्राम की जगह
नहीं है।
वर्तमान परिस्थिति पर कुछ हद तक विचार करने के बाद भविष्य के कार्यक्रम और
कार्यनीति पर भी विचार कर लिया जाये।
जैसाकि मैंने पहले भी कहा है कि किसी क्रान्तिकारी पार्टी के लिए
निश्चित कार्यक्रम होना बहुत ज़रूरी है। आपको यह पता होना चाहिए कि क्रान्ति
का मतलब गतिविधि है। इसका मतलब संगठित व क्रमबद्ध काम द्वारा
सोची-समझी तब्दीली लाना है और यह तोड़-फोड़ – असंगठित, एकदम या
स्वतः परिवर्तन – के विरुद्ध है। कार्यक्रम बनाने के लिए अनिवार्य रूप से इन
बातों के अध्ययन की ज़रूरत है –
- मंज़िल (लक्ष्य) या उद्देश्य।
- आधार, जहाँ से शुरू करना है, यानी वर्तमान परिस्थिति।
- कार्यरूप, यानी साधन व दाँव-पेंच।
जब तक इन तत्त्वों के सम्बन्ध में कुछ स्पष्ट संकल्प नहीं है, तब तक
विचारों की सान पर क्रान्ति की तलवार / 483