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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 470, कुल 788 में से

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पृष्ठ 470

का कायल हो चुका हूँ। मुझे पक्का विश्वास हो गया है कि प्रकृति का निर्देशन
और संचालन करने वाली किसी चेतन परम सत्ता का कोई अस्तित्व नहीं है। हम
प्रकृति में विश्वास करते हैं और प्रकृति को मानव सेवा में नियोजित करने के लिए
उसे मनुष्य की वशवर्ती बनाना समूचे प्रगतिशील आन्दोलन का लक्ष्य है। उसे चलाने
वाली कोई चेतन शक्ति उसके पीछे नहीं है, यही हमारा दर्शन है।
नकारात्मक पक्ष की ओर से हम आस्तिकों से कुछ सवाल पूछते हैं : यदि
आप के विश्वास के अनुसार कोई सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी और सर्वज्ञ ईश्वर है,
जिसने इस पृथ्वी या दुनिया की सृष्टि की तो कृपया यह बताइये कि उसने ऐसा
क्यों किया? उसने ऐसी दुनिया क्यों बनाई जिसमें तमाम दुख हैं, तकलीफ़ें हैं,
जिसमें वास्तविक जीवन की त्रासदियों का एक अनन्त सिलसिला है और जिसमें
एक भी प्राणी पूरी तरह सन्तुष्ट नहीं है?
कृपा करके यह न कहिये कि यह उसका नियम है, क्योंकि वह किसी नियम
से बँधा हुआ है तो सर्वशक्तिमान नहीं है, तब तो वह हम जैसा ही एक गुलाम है।
कृपया यह भी न कहिये कि यह उसकी लीला या क्रीड़ा है जिसमें उसे आनन्द
आता है। नीरो ने तो एक ही रोम को जलाया था। उसने तो थोड़े-से लोगों की ही
जानें ली थीं। उसने तो पूर्णतः अपने आनन्द के लिए कुछ ही त्रासदियों को जन्म
दिया था। और इतिहास में उसकी जगह कहाँ है? इतिहासकार उसे किस नाम से
याद करते हैं? दुनियाभर की नफ़रतभरी लानतें उस पर बरसायी जाती हैं।
अत्याचारी, हृदयहीन और दुष्ट नीरो की भर्त्सना करते हुए पृष्ठ पर पृष्ठ गालियों
से भरी कटु निन्दाओं से काले किये गये हैं। एक चंगेज़ख़ाँ था, जिसने हत्या का
आनन्द लेने के लिए कुछ हज़ार लोगों की जानें ले ली थी और हम उसके नाम
तक से नफ़रत करते हैं। तब आप अपने सर्वशक्तिमान, शाश्वत नीरो को उचित कैसे
ठहरायेंगे जो हर दिन, हर घण्टे और हर मिनट असंख्य त्रासदियों को जन्म देता रहा
है और आज भी दे रहा है? कैसे आप उसके उन दुष्कृत्यों का समर्थन करेंगे, जो
प्रतिक्षण चंगेज़ख़ाँ के दुष्कृत्यों को मात करते हैं?
मैं पूछता हूँ, उसने यह दुनिया बनायी ही क्यों, जो साक्षात नर्क है, जो अनन्त
और तल्ख़ बेचैनी का घर है? उस सर्वशक्तिमान ने मनुष्य की सृष्टि क्यों की
जबकि उसके पास ऐसी सृष्टि न करने की शक्ति थी? इस सबका औचित्य क्या
है? क्या कहा, परलोक में निर्दोष पीड़ितों को पुरस्कार और कुकर्म करने वालों
को दण्ड देने के लिए? अच्छा, तो यह बताइये कि उस आदमी को आप कहाँ तक
सही ठहरायेंगे जो बाद में मुलायम और आरामदायक मरहम लगाने के लिए आपके
शरीर को ज़ख़्मों से छलनी कर दे? ग्लैडिएटों की संस्था के समर्थक और
प्रबन्धक, जो पहले तो लोगों को भूखे और क्रुद्ध शेरों के सामने फेंक देते थे और
बाद में अगर वे लोग ज़िन्दा बच जाते तो उनकी बड़ी अच्छी देखभाल करते थे,
464 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़