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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 458, कुल 788 में से

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पृष्ठ 458

यदि तुम चाहते हो कि क्रान्तिकारी अपनी गतिविधियों को स्थगित कर दें तो
उसके लिए होना तो यह चाहिए कि उनके साथ तर्क द्वारा अपना मत प्रमाणित
किया जाये। यह एक, और केवल यही एक रास्ता है, और बाक़ी बातों के विषय
में किसी को सन्देह नहीं होना चाहिए। क्रान्तिकारी इस प्रकार के डराने-धमकाने
से कदापि हार मानने वाला नहीं।
हम प्रत्येक देशभक्त से निवेदन करते हैं कि वे हमारे साथ गम्भीरतापूर्वक इस
युद्ध में शामिल हों। कोई भी व्यक्ति अहिंसा और ऐसे ही अजीबो-ग़रीब तरीक़ों से
मनोवैज्ञानिक प्रयोग कर राष्ट्र की स्वतन्त्रता के साथ खिलवाड़ न करे। स्वतन्त्रता
राष्ट्र का प्राण है। हमारी गुलामी हमारे लिए लज्जास्पद है, न जाने कब हममें यह
बुद्धि और साहस होगा कि हम उससे मुक्ति प्राप्त कर स्वतन्त्र हो सकें? हमारी
प्राचीन सभ्यता और गौरव की विरासत का क्या लाभ, यदि हममें यह स्वाभिमान
न रहे कि हम विदेशी गुलामी, विदेशी झण्डे और बादशाह के सामने सिर झुकाने
से अपनेआप को न रोक सकें।
क्या यह अपराध नहीं है कि ब्रिटेन ने भारत में अनैतिक शासन किया? हमें
भिखारी बनाया तथा हमारा समस्त ख़ून चूस लिया? एक जाति और मानवता के
नाते हमारा घोर अपमान तथा शोषण किया गया है। क्या जनता अब भी चाहती है
कि इस अपमान को भुलाकर हम ब्रिटिश शासकों को क्षमा कर दें? हम बदला
लेंगे, जो जनता द्वारा शासकों से लिया गया न्यायोचित बदला होगा। कायरों को पीठ
दिखाकर समझौता और शान्ति की आशा से चिपके रहने दीजिये। हम किसी से भी
दया की भिक्षा नहीं माँगते हैं और हम भी किसी को क्षमा नहीं करेंगे। हमारा युद्ध
विजय या मृत्यु के निर्णय तक चलता ही रहेगा। इन्क़लाब ज़िन्दाबाद!
करतार सिंह*
अध्यक्ष
(26 जनवरी, 1930) हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन
(*भगतसिंह का छद्म नाम)
452 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़