भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 440, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंशहीद महावीर सिंह का पिता के नाम पत्र
शहीद महावीर सिंह को लाहौर षड्यन्त्र केस में उम्रक़ैद की सज़ा हुई थी। डॉ.
गया प्रसाद, शिव वर्मा, पण्डित किशोरीलाल, जयदेव कपूर, विजय कपूर सिन्हा और
कमलनाथ तिवारी को भी उम्रक़ैद हुई थी। इन सभी साथियों को सेल्युलर जेल,
अण्डमान भेजा गया था। ब्रिटिश सरकार के अत्याचारों के विरुद्ध जेलों के भीतर
भी क्रान्तिकारियों का संघर्ष जारी रहा। महावीर सिंह ने 23 जनवरी, 1933 को
अण्डमान से पिता को यह पत्र लिखा था। - स.
पोर्ट ब्लेयर, अण्डमान
परम पूज्य पिताजी,
आपको पढ़कर आश्चर्य होगा कि उपरोक्त स्थान पर मैं कब आ गया। यही
पहेली हल करने मैं जा रहा हूँ। तारीख़ 19 जनवरी को प्रातःकाल लगभग 11 बजे
जेलर साहब सेण्ट्रल जेल बिलारी आये और कोठरी का दरवाज़ा खोलकर सूचना
दी कि तुम्हारा ट्रांसफर है, पर यह नहीं बताया कि कहाँ को है। पूछने पर केवल
इतना कहा कि शायद पंजाब में नये लाहौर साज़िश केस में गवाही देने के लिए
मद्रास भेजे जाओगे। अस्तु, 19 तारीख़ की शाम को जब मैंने सेण्ट्रल जेल मद्रास
में पैर रखा तो मेरे जीवन-मरण के साथी श्रीयुत भाई कमलनाथ तिवारी के दर्शन
- लगभग दो वर्ष बाद - हुए और रात को भाई बी.के. दत्त और भाई कुन्दनलाल
जी की आवाज़ें सुनीं। आप स्वयं ही जान सकते हैं कि मुझे कितनी प्रसन्नता हुई।
परन्तु अलस्सुबह फिर कुछ निराशा की झलक नज़र आयी जब देखा कि तिवारी
और भाई दत्त और कुन्दनलाल हमसे पहले पृथक ले जाये गये हैं, परन्तु 15 मिनट
बाद वह फिर हर्ष में बदल गयी और मोटर लॉरी में हम फिर मिल गये। बहुत दिनों
का वियोग मिट गया। उस समय तक हम मन की खिचड़ी पका रहे थे और मिलने
के आनन्द में विह्वल थे, परन्तु यह पता नहीं था कि कहाँ जा रहे हैं। सोचते थे
शायद पंजाब जावें, बाद में यहाँ आवें। परन्तु हमारी लॉरी बन्दरगाह पर पहुँची और
विख्यात महाराजा जहाज़ के दर्शन हुए। उस समय समझा कि हम लोग अण्डमान
अर्थात 'कालापानी' जा रहे हैं। मातृभूमि से तथा बन्धु वर्ग से सदैव के लिए अथवा
कम से कम 18 साल के लिए पृथक हो रहे हैं। जिस जननी की गोद में पले हैं
434 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़