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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 437, कुल 788 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 437

कुलबीर के नाम
भगतसिंह का अन्तिम पत्र¹
सेण्ट्रल जेल, लाहौर
3 मार्च, 1931
प्रिय कुलबीर सिंह,
तुमने मेरे लिए बहुत कुछ किया। मुलाक़ात के समय तुमने अपने ख़त के
जवाब में कुछ लिख देने के लिए कहा था। कुछ शब्द लिख दूँ, बस। देख, मैंने
किसी के लिए कुछ न किया। तुम्हारे लिए भी कुछ न कर सका। आज तुम सबको
विपदाओं में छोड़कर जा रहा हूँ। तुम्हारी ज़िन्दगी का क्या होगा? गुज़र किस तरह
करोगे? यही सब सोचकर काँप जाता हूँ। लेकिन भाई हौसला रखना। विपदाओं में
भी कभी न घबराना। इसके सिवाय और क्या कह सकता हूँ। अमेरिका जा सकते
तो बहुत अच्छा होता। लेकिन अब तो यह नामुमकिन जान पड़ता है। धीरे-धीरे
हिम्मत से पढ़ लो। अगर कोई काम सीख सको तो बेहतर होगा। लेकिन सबकुछ
पिता जी की सलाह से करना। जहाँ तक सम्भव हो प्यार-मुहब्बत से रहना। इसके
सिवाय और क्या कहूँ? जानता हूँ कि आज तुम्हारे दिल में ग़म का समुद्र ठाठें मार
रहा है। तुम्हारे बारे में सोचकर मेरी आँखों में आँसू आ रहे हैं; लेकिन क्या किया
जा सकता है? हौसला रख मेरे अज़ीज़! मेरे प्यारे भाई, ज़िन्दगी बड़ी सख़्त है और
दुनिया बड़ी बेरहम। लोग भी बहुत बेरहम हैं। सिर्फ़ हिम्मत और प्यार से ही गुज़ारा
हो सकेगा। कुलतार की पढ़ाई की चिन्ता भी तुम्हीं करना। बहुत शर्म आती है और
अफ़सोस के सिवाय मैं कर भी क्या सकता हूँ। साथ वाला ख़त हिन्दी में लिखा
है। ख़त बी.के. की बहन को दे देना। अच्छा नमस्कार अज़ीज़ भाई अलविदा...
रुख़सत।
तुम्हारा शुभाकांक्षी,
भगतसिंह

  1. फाँसी लगने से बीस दिन पूर्व।
    जेल की सलाख़ों के पीछे से / 431