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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 422, कुल 788 में से

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कुलबीर को एक और पत्र

सेण्ट्रल जेल, लाहौर
25 सितम्बर, 1930
प्रिय भाई कुलबीर सिंह जी,
सत श्री अकाल!
मुझे यह जानकर कि एक दिन तुम माँजी को साथ लेकर आये और मुलाक़ात
का आदेश न मिलने से निराश होकर वापस लौट गये, बहुत दुख हुआ। तुम्हें तो
पता चल चुका था कि जेल में मुलाक़ात की इजाज़त नहीं देते। फिर माँजी को
साथ क्यों लाये? मैं जानता हूँ कि इस समय वे बहुत घबरायी हुई हैं, लेकिन इस
घबराहट और परेशानी का क्या फ़ायदा, नुक़सान ज़रूर है, क्योंकि जब से मुझे पता
चला कि वे बहुत रो रही हैं, मैं स्वयं भी बेचैन हो रहा हूँ। घबराने की कोई बात
नहीं, फिर इससे कुछ मिलता भी नहीं। सभी साहस से हालात का मुक़ाबला करें।
आख़िरकार दुनिया में दूसरे लोग भी तो हज़ारों मुसीबतों में फँसे हुए हैं। और फिर
अगर लगातार एक बरस तक मुलाक़ातें करके भी तबीयत नहीं भरी तो और दो-चार
मुलाक़ातों से भी तसल्ली न होगी। मेरा ख़याल है कि फ़ैसले और चालान के बाद
मुलाक़ातों से पाबन्दी हट जायेगी, लेकिन माना कि इसके बावजूद मुलाक़ात की
इजाज़त न मिले तो...इसलिए घबराने से क्या फ़ायदा?
तुम्हारा भाई,
भगतसिंह
416 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़