भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 409, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंआप इसे आत्महत्या कहेंगे? हमारा कष्ट सहन करना फलीभूत हुआ। समस्त देश
में एक विराट और सर्वव्यापी आन्दोलन शुरू हो गया। हम अपने लक्ष्य में सफल
हुए। इस प्रकार के संघर्ष में मरना एक आदर्श मृत्यु है।
इसके अतिरिक्त हममें से जिन लोगों को यह विश्वास है कि उनको
मृत्युदण्ड दिया जायेगा, उनको धैर्यपूर्वक उस दिन की प्रतीक्षा करनी चाहिए जब
यह सज़ा सुनायी जायेगी और तत्पश्चात उन्हें फाँसी दी जायेगी। यह मृत्यु भी
सुन्दर होगी, परन्तु आत्महत्या करना, केवल कुछ दुखों से बचने के लिए अपने
जीवन को समाप्त कर देना, तो कायरता है। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि
विपत्तियाँ व्यक्ति को पूर्ण बनाने वाली होती हैं। मैं और आप, वरन मैं कहूँगा,
हममें से किसी ने भी किंचित कष्ट सहन नहीं किया है। हमारे जीवन का यह
भाग तो अभी आरम्भ होता है।
आपको यह याद होगा कि अनेक बार इस विषय पर हमने बातचीत की है
कि रूसी साहित्य में प्रत्येक स्थान पर जो वास्तविकता मिलती है, वह हमारे
साहित्य में कदापि नहीं दिखायी देती। हम उनकी कहानियों में कष्टों और दुखदायी
स्थितियों को बहुत पसन्द करते हैं, परन्तु कष्ट-सहन की उस भावना को अपने
भीतर अनुभव नहीं करते। हम उनके उन्माद और उनके चरित्र की असाधारण
ऊँचाइयों के प्रशंसक हैं, परन्तु इसके कारणों पर सोच-विचार करने की कभी चिन्ता
नहीं करते। मैं कहूँगा कि केवल विपत्तियाँ सहन करने के उल्लेख ने ही उन
कहानियों में सहृदयता, दर्द की गहरी टीस और उनके चरित्र तथा साहित्य में ऊँचाई
उत्पन्न की है। हमारी दशा उस समय दयनीय और हास्यास्पद हो जाती है, जब हम
अपने जीवन में अकारण ही रहस्यवाद प्रविष्ट कर लेते हैं, यद्यपि इसके लिए कोई
प्राकृतिक या ठोस आधार नहीं होता। हमारे जैसे व्यक्तियों को, जो प्रत्येक दृष्टि से
क्रान्तिकारी होने का गर्व करते हैं, सदैव हर प्रकार से उन विपत्तियों, चिन्ताओं, दुखों
और कष्टों को सहन करने के लिए तत्पर रहना चाहिए जिनको हम स्वयं आरम्भ
किये संघर्ष के द्वारा आमन्त्रित करते हैं एवं जिनके कारण हम अपनेआप को
क्रान्तिकारी कहते हैं।
मैं आपको बताना चाहता हूँ कि जेलों में और केवल जेलों में ही कोई व्यक्ति
अपराध एवं पाप जैसे महान सामाजिक विषय का प्रत्यक्ष अध्ययन करने का अवसर
पा सकता है। मैंने इस विषय का कुछ साहित्य पढ़ा है और जेलें ही ऐसे विषयों
का स्वाध्याय करने के सबसे अधिक उपयुक्त स्थान हैं। स्वाध्याय का सर्वश्रेष्ठ भाग
है : स्वयं कष्टों को सहना।
आप भली प्रकार जानते हैं कि रूस में राजनीतिक बन्दियों का बन्दीगृहों में
विपत्तियाँ सहन करना ही ज़ारशाही का तख़्ता उलटने के पश्चात उनके द्वारा जेलों
के प्रबन्ध में क्रान्ति लाये जाने का सबसे बड़ा कारण था। क्या भारत को ऐसे
जेल की सलाख़ों के पीछे से / 403