भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 369, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंगृह मन्त्री, भारत सरकार को तार
ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध क्रान्तिकारियों ने जेल में भी प्रतिदिन संघर्ष जारी
रखा। जेलों में सुधार के लिए जो भूख हड़ताल शुरू की गयी, वह कई मंज़िलों से
गुज़री। यतीन्द्रनाथ दास शहीद हुए, सरकार ने कुछ वायदे किये। एक बार भूख
हड़ताल छोड़ी गयी, और फिर शुरू कर दी गयी, क्योंकि सरकार के वायदे झूठे
साबित हुए थे। जनता के सामने सरकार की असलियत लाना उस अभियान का हिस्सा
था। फिर शुरू हुई भूख हड़ताल में सरकार ने कई बेहूदा ढंग अपनाये, लेकिन
क्रान्तिकारी दृढ़ता से अपने विश्वासों पर स्थिर रहे। भगतसिंह और उनके साथी सभी
कष्टों को हँसकर झेलने के सिद्धान्त पर चलते रहे।
20 जनवरी, 1930
प्रति,
गृहमन्त्री, भारत
भगतसिंह और अन्य क़ैदियों की ओर से।
समिति के इस आश्वासन पर कि राजनीतिक क़ैदियों के साथ व्यवहार का
प्रश्न हमारे सन्तोष के अनुसार शीघ्र ही अन्तिम रूप में हल किया जा रहा है, हमने
अपनी भूख हड़ताल स्थगित कर दी थी। अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के भूख
हड़ताल सम्बन्धी प्रस्तावों की प्रतियाँ जेल-अधिकारियों ने रोक ली हैं। कांग्रेस
प्रतिनिधि मण्डल को क़ैदियों से मिलने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया गया
है। षड्यन्त्र केस से सम्बन्धित विचाराधीन व्यक्तियों पर पुलिस-अधिकारियों की
आज्ञा से 23, 24 अक्टूबर, 1929 को बुरी तरह हमले किये गये।
जेल की सलाख़ों के पीछे से / 363