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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 317, कुल 788 में से

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पृष्ठ 317

लाला लाजपत राय
और एग्निस स्मेडली
'दि पीपल' (The People) एक अंग्रेज़ी साप्ताहिक समाचारपत्र है। इसके संस्थापक
और सम्पादक पंजाब केसरी लाला लाजपत राय हैं। जिस समय वह पत्र आरम्भ
किया गया था तब उसमें पहले पृष्ठ पर लाला जी की ओर से यह घोषणा की
गयी थी कि इस समाचारपत्र में हर प्रकार के विचार दिये जायेंगे तथा हर विचार
को, भले ही वह किसी भी तरह का हो, सुना जाया करेगा और उस पर धैर्य और
गम्भीरता से विचार किया जायेगा। कुल मिलाकर यह कि यह पत्र एक खुला
विचार-मंच (ओपन फ़ोरम) बनाया गया था, जहाँ प्रत्येक बात पर बहस और
विचार होना था ताकि अंग्रेज़ी पढ़ी-लिखी जनता वास्तविक स्थितियों से परिचित
हो सके तथा अपनी सही राय क़ायम कर सके।
इन पंक्तियों का लेखक इस पत्र को आरम्भ से पढ़ता रहा है। यह पत्र अच्छे
समाचारपत्रों में एक है। इसमें अक्टूबर, 1927 तक घोषित उद्देश्यों का पूर्णतया पालन
किया जाता रहा है। इसमें विद्वान लेखकों के अच्छे-अच्छे लेख प्रकाशित होते रहे
हैं, लेकिन 10 अक्टूबर, 1927 से इसने अपने मुख्य उद्देश्य से मुँह फेर लिया है
और मिस स्मेडली के लेख प्रकाशित करने बन्द कर दिये हैं।
मिस एग्निस स्मेडली यूरोप की एक प्रख्यात लेखिका हैं। वे बर्लिन के एक
विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी की प्राध्यापिका हैं। लाला जी व्यक्तिगत तौर पर उन्हें
जानते हैं। लाला जी ने उनके सन्दर्भ में लिखा था – "पिछले दस बरसों से मैं
मिस स्मेडली को जानता हूँ। मैंने उनकी ईमानदारी पर कभी शक नहीं किया। यह
ऐसी स्त्री नहीं जिन्हें कि रुपये-पैसे से ख़रीदा जा सके। वे जन्मजात युगान्तकारी
हैं। इसलिए उनका स्वभाव, रुझान एवं आदतें सभी एक युगान्तकारी जैसी हैं। उनका
जीवन सम्मान से जीने में बीता है। इन बातों ने युग-परिवर्तन की ओर उनका झुकाव
बढ़ा दिया है। व्यक्तिगत तौर पर उनके विचार पूर्णतया पवित्र एवं सुस्पष्ट हैं। वह
एक ऐसी स्त्री हैं जो अपने कार्य एवं मित्रों के लिए बड़े से बड़ा बलिदान कर
सकती हैं। मैं व्यक्तिगत परिचय के आधार पर कह सकता हूँ कि उन्हें सोना-चाँदी
जैसी चीजें बिल्कुल भी नहीं भरमा सकती हैं।"
नौजवान भारत सभा और राष्ट्रीय नेतृत्व का मूल्यांकन / 311