भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 310, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंजनता को जगाने के लिए कोई योजना पेश करके उस पर अमल करने का
किसी ने भी साहस नहीं किया। विस्तार में गये बग़ैर हम यह दावे से कह सकते
हैं कि अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए रूसी नवयुवकों की भाँति हमारे हज़ारों
मेधावी नौजवानों को अपना बहुमूल्य जीवन गाँवों में बिताना पड़ेगा और लोगों को
समझाना पड़ेगा कि भारतीय क्रान्ति वास्तव में क्या होगी। उन्हें समझाना पड़ेगा
कि आने वाली क्रान्ति का मतलब केवल मालिकों की तब्दीली नहीं होगा।
उसका अर्थ होगा नयी व्यवस्था का जन्म – एक नयी राजसत्ता। यह एक दिन या
एक वर्ष का काम नहीं है। कई दशकों का अद्वितीय आत्मबलिदान ही जनता को
उस महान कार्य के लिए तत्पर कर सकेगा और इस कार्य को केवल क्रान्तिकारी
युवक ही पूरा कर सकेंगे। क्रान्तिकारी से लामुहाला एक बम और पिस्तौल वाले
आदमी से अभिप्राय नहीं है।
युवकों के सामने जो काम है, वह काफ़ी कठिन है और उनके साधन बहुत
थोड़े हैं। उनके मार्ग में बहुत-सी बाधाएँ भी आ सकती हैं। लेकिन थोड़े किन्तु
निष्ठावान व्यक्तियों की लगन उन पर विजय पा सकती है। युवकों को आगे जाना
चाहिए। उनके सामने जो कठिन एवं बाधाओं से भरा हुआ मार्ग है, और उन्हें जो
महान कार्य सम्पन्न करना है, उसे समझना होगा। उन्हें अपने दिल में यह बात रख
लेनी चाहिए कि “सफलता मात्र एक संयोग है, जबकि बलिदान एक नियम है।”
उनके जीवन अनवरत असफलताओं के जीवन हो सकते हैं – गुरु गोविन्द सिंह को
आजीवन जिन नारकीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था, हो सकता है उससे
भी अधिक नारकीय परिस्थितियों का सामना करना पड़े। फिर भी उन्हें यह कहकर
कि अरे, यह सब तो भ्रम था, पश्चाताप नहीं करना होगा।
नौजवान दोस्तो, इतनी बड़ी लड़ाई में अपनेआप को अकेला पाकर हताश मत
होना। अपनी शक्ति को पहचानो। अपने ऊपर भरोसा करो। सफलता आपकी है।
धनहीन, निस्सहाय एवं साधनहीन अवस्था में भाग्य आज़माने के लिए अपने पुत्र
को घर से बाहर भेजते समय जेम्स गैरीबाल्डी की महान जननी ने उससे जो शब्द
कहे थे (उन्हें) याद रखो। उसने कहा, “दस में से नौ बार एक नौजवान के साथ
जो सबसे अच्छी घटना हो सकती है वह यह है कि उसे जहाज़ की छत पर से
समुद्र में फेंक दिया जाये ताकि वह तैरकर या डूबकर स्वयं अपना रास्ता तय करे।”
प्रणाम है उस माँ को जिसने ये शब्द कहे और प्रणाम है उन लोगों को जो इन शब्दों
पर अमल करेंगे।
इतालवी पुनरुत्थान के प्रसिद्ध विद्वान मैजिनी ने एक बार कहा था, “सभी
महान राष्ट्रीय आन्दोलनों का शुभारम्भ जनता के अविख्यात या अनजाने,
ग़ैर-प्रभावशाली व्यक्तियों से होता है, जिनके पास समय और बाधाओं की परवाह
न करने वाला विश्वास तथा इच्छा-शक्ति के अलावा और कुछ नहीं होता।” जीवन
304 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़