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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 305, कुल 788 में से

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पृष्ठ 305

नौजवान भारत सभा,
लाहौर का घोषणापत्र
भगतसिंह और भगवतीचरण वोहरा ने नौजवानों और विद्यार्थियों को संगठित
करने के प्रयास 1926 से ही शुरू कर दिये थे। अमृतसर में 11, 12, 13 अप्रैल,
1928 को हुए नौजवान भारत सभा के सम्मेलन के लिए सभा का घोषणापत्र तैयार
किया गया। भगतसिंह इस सभा के महासचिव और भगवतीचरण वोहरा प्रचार-सचिव
बने।
नौजवान साथियो,
हमारा देश एक अव्यवस्था की स्थिति से गुज़र रहा है। चारों तरफ़ एक-दूसरे
के प्रति अविश्वास और हताशा का साम्राज्य है। देश के बड़े नेताओं ने अपने आदर्श
के प्रति आस्था खो दी है और उनमें से अधिकांश को जनता का विश्वास प्राप्त
नहीं है। भारत की आज़ादी के पैरोकारों के पास कोई कार्यक्रम नहीं है, और उनमें
उत्साह का अभाव है। चारों तरफ़ अराजकता है। लेकिन किसी राष्ट्र के निर्माण की
प्रक्रिया में अराजकता एक अनिवार्य तथा आवश्यक दौर है। ऐसी ही नाज़ुक घड़ियों
में कार्यकर्ताओं की ईमानदारी की परख होती है, उनके चरित्र का निर्माण होता है,
वास्तविक कार्यक्रम बनता है, और तब नये उत्साह, नयी आशाओं, नये विश्वास
और नये जोशो-खरोश के साथ काम आरम्भ होता है। इसलिए इसमें मन ओछा करने
की कोई बात नहीं है।
हम अपनेआप को एक नये युग के द्वार पर खड़ा पाकर बड़े भाग्यशाली हैं।
अंग्रेज़ नौकरशाही के बड़े पैमाने पर गुणगान करने वाले गीत अब सुनायी नहीं देते।
अंग्रेज़ का हमसे यह ऐतिहासिक प्रश्न है कि “तुम तलवार से प्रशासित होगे या
क़लम से?” अब ऐसा नहीं रहा कि उसका उत्तर न दिया जाता हो। लॉर्ड बर्केनहेड
के शब्दों में, “हमने भारत को तलवार के सहारे जीता और तलवार के बल से ही
हम उसे अपने हाथ में रखेंगे।” इस खरेपन ने अब सबकुछ साफ़ कर दिया है।
जलियाँवाला और मानावाला के अत्याचारों को याद करने के बाद यह उद्धृत करना
कि “अच्छी सरकार स्वशासन का स्थान नहीं ले सकती”, बेहूदगी ही कही
नौजवान भारत सभा और राष्ट्रीय नेतृत्व का मूल्यांकन / 299