भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 284, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंगिरफ़्तार कर लिया गया तो इनको बहुत घबराहट हुई, क्योंकि वह अभी बिल्कुल
बच्चा था और पढ़ रहा था। ज़्यादा चिन्ता यह थी कि संकट में कहीं वह घबरा
न जाये। लेकिन मालूम हुआ कि वह जेल में बिल्कुल निश्चन्तता से रह रहा है।
इस बात से इन्हें बहुत खुशी हासिल हुई। कहने लगीं, "मुझे अपने भूपेन्द्र से यही
आशाएँ थीं।"
लेकिन उनका सारा जीवन कठिनाइयों में ही गुज़र गया। उन्हें कभी चैन का
समय ही नहीं मिला। देखते-देखते काकोरी का मुक़दमा समाप्त हो गया। और
कोई ठोस सबूत न मिलने के बावजूद श्री शचीन्द्रनाथ सान्याल को आजीवन क़ैद
और भूपेन्द्रनाथ को पाँच साल की सज़ा हो गयी। यह झटका उनसे बरदाश्त न हो
सका। यह चोट उनसे सही न गयी। वह फिर कभी न सँभल सकीं। लेकिन
अपने पुत्रों पर उन्हें बहुत फ़ख़्र रहा। उन्होंने शचीन्द्रनाथ सान्याल को अपने अन्तिम
पत्र में लिखा था कि दुनियादारी के हिसाब से भले ही मैं बहुत ग़रीब हूँ, लेकिन
मेरे जैसा अमीर कौन है जिसके पुत्र सत्यपथ पर चल रहे हैं और देश-सेवा में
जिन्होंने अपनी ज़िन्दगियाँ अर्पण कर दी हैं, मुझे अपने पर बहुत नाज़ है।
आह! ऐसी और कितनी माताएँ आज हमारे देश में हैं? धन्य है यह माँ और
धन्य-धन्य हैं इनके सुपुत्र!
278 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़