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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 280, कुल 788 में से

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पृष्ठ 280

श्री इन्द्रचन्द्र नारंग का मुक़दमा

श्री इन्द्रचन्द्र नारंग का देवघर षड्यन्त्र केस से सम्बन्धित यह सम्पादकीय
टिप्पणी – सितम्बर, 1928 ‘किरती’ में छपी थी। ब्रिटिश शासन में नागरिक स्वतन्त्रता
और जनवादी अधिकारों की स्थिति पर यह टिप्पणी महत्त्वपूर्ण प्रकाश डालती है।
– स.
पाठक पिछली बार देवघर साज़िश केस के बारे में पढ़ चुके हैं। उस मुक़दमे
के निर्णय के बारे में हमने संक्षेप में लिखा था। उसमें ही एक पंजाबी नौजवान
श्री इन्द्रचन्द्र नारंग को अकारण तीन साल की सज़ा दी गयी है। आज उनके मुक़दमे
का निर्णय हमारे सामने है। इसे पढ़ते हुए आश्चर्य हो रहा है कि किस कारण उन्हें
सज़ा दी गयी है। उनके विरुद्ध यही रहा कि देवघर की तलाशी में जो एक सूची
मिली थी उसमें उनका नाम भी था। और तलाशी में ‘बन्दी जीवन’ की साठ प्रतियाँ
मिली थीं और एक अन्य व्यक्ति के पास से तलाशी में डॉक्टर भूपेन्द्रनाथ दत्त,
अध्यक्ष राजनीतिक पीड़ित कॉन्फ़्रेंस (पोलिटिकल सफ़रर्स कॉन्फ़्रेंस) का पता मिला
था। उसने कहा था कि यह उसने श्री इन्द्रचन्द्र से लिया था, बस।
सूची में नाम मिलने से इन्द्रचन्द्र का कोई विशेष अपराध नहीं बन जाता।
अन्य साठ-सत्तर व्यक्तियों के भी तो नाम थे, लेकिन उनसे तो पूछताछ भी नहीं
की गयी।
सबसे अधिक ज़ोर इस बात पर दिया गया है कि वह ‘बन्दी जीवन’ बेचता
था और इसलिए यह राजपरिवर्तनकारी साज़िश का सदस्य समझा जाता है। ख़ूब!
हम पूछते हैं कि ‘बन्दी जीवन’ क्या ज़ब्त किताब है? क्या सरकार ने उसकी
बिक्री पर रोक लगायी हुई है? यदि नहीं तो श्री इन्द्रचन्द्र को सज़ा किस बात
की दी गयी है? मज़ा तो यह है कि किताब उसके भाई ने लाहौर-हिन्दी भवन
से प्रकाशित की है। उसकी बिक्री के लिए सभी ने प्रयत्न किये हैं। लेकिन इसमें
साज़िश का क्या सबूत है? क्या डॉक्टर भूपेन्द्रनाथ दत्त का अध्यक्षीय सम्बोधन
सरकार ने ज़ब्त कर लिया है? यदि नहीं, तो वह किसी व्यक्ति को पढ़ने के
लिए देना ही किस तरह अपराध हो गया? पहले श्री इन्द्रचन्द्र ने समाचारपत्र की
एजेंसी लेने का प्रयास किया था। वह जैसे-तैसे पैसे कमाकर गुज़ारा कर रहा था
274 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़