सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 266, कुल 788 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 266

गुत्थमगुत्था ही हुए, वरन सभी हिन्दू-मुसलमान बड़े प्रेम से कारख़ानों आदि में
उठते-बैठते और दंगे रोकने के भी यत्न करते रहे। यह इसलिए कि उनमें वर्ग-चेतना
थी और वे अपने वर्गहित को अच्छी तरह पहचानते थे। वर्ग-चेतना का यही सुन्दर
रास्ता है, जो साम्प्रदायिक दंगे रोक सकता है।
यह खुशी का समाचार हमारे कानों को मिला है कि भारत के नवयुवक अब
वैसे धर्मों से जो परस्पर लड़ाना व घृणा करना सिखाते हैं, तंग आकर हाथ धो रहे
हैं और उनमें इतना खुलापन आ गया है कि वे भारत के लोगों को धर्म की नज़र
से – हिन्दू, मुसलमान या सिख-रूप में नहीं, वरन सभी को पहले इन्सान समझते
हैं, फिर भारतवासी। भारत के युवकों में इन विचारों के पैदा होने से पता चलता
है कि भारत का भविष्य सुनहला है और भारतवासियों को इन दंगों आदि को
देखकर घबराना नहीं चाहिए, बल्कि तैयार-बर-तैयार हो यत्न करना चाहिए कि
ऐसा वातावरण ही न बने, ताकि दंगे हों ही नहीं।
1914-15 के शहीदों ने धर्म को राजनीति से अलग कर दिया था। वे समझते
थे कि धर्म व्यक्ति का व्यक्तिगत मामला है, इसमें दूसरे का कोई दख़ल नहीं। न
ही इसे राजनीति में घुसाना चाहिए, क्योंकि यह सरबत को मिलकर एक जगह काम
नहीं करने देता। इसीलिए ग़दर पार्टी जैसे आन्दोलन एकजुट व एकजान रहे, जिसमें
सिख बढ़-चढ़कर फाँसियों पर चढ़े और हिन्दू-मुसलमान भी पीछे नहीं रहे।
इस समय कुछ भारतीय नेता भी मैदान में उतरे हैं, जो धर्म को राजनीति से
अलग करना चाहते हैं। झगड़ा मिटाने का यह भी एक सुन्दर इलाज है और हम
इसका समर्थन करते हैं।
यदि धर्म को अलग कर दिया जाये तो राजनीति पर हम सभी इकट्ठा हो
सकते हैं। धर्मों में हम चाहे अलग-अलग ही रहें।
हमारा ख़याल है कि भारत के सच्चे हमदर्द हमारे बताये इलाज पर ज़रूर
विचार करेंगे और भारत का इस समय जो आत्मघात हो रहा है, उससे हमें बचा
लेंगे।
260 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़