भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 261, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंक्या करें? आपने कहा कि मुसीबत आयेगी, नुक़सान अधिक होगा, लेकिन यह
अत्याचारी टैक्स नहीं देना चाहिए। जलसे हुए। 7000 व्यक्तियों ने टैक्स न देने के
काग़ज़ों पर हस्ताक्षर कर सरकार को भेज दिये। तैयारियाँ हो रही हैं।
तीसरी जगह मेरठ है। वहाँ भी बन्दोबस्त हुआ और लगान बढ़ गया। वहाँ भी
सत्याग्रह की घोषणा कर दी गयी है।
पंजाब में भी कुछ ऐसी ही बातें नज़र आ रही हैं। शेखूपुर और लाहौर ज़िलों
में ओले गिरने से फ़सलें नष्ट हो गयी थीं। अनाज कुछ भी नहीं हुआ, फिर लगान
कैसे दिया जाये? लेकिन यहाँ के सयाने-सयाने आदमी और ही तरह की बातें करते
हैं – “कांग्रेस के ‘बदनाम’ आदमी उन किसानों में भाषण न दें, कहीं सरकार
नाराज़ न हो जाये!” ऐसी-ऐसी बातें हो रही हैं, लेकिन उन्हें अच्छी तरह याद रखना
चाहिए कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते। अंग्रेज़ पैसे के पीर और उम्मीद यह
की जाये कि वे लगान अपनेआप माफ़ कर देंगे। यह भ्रम अभी कब तक चलेगा?
हड़तालें
उधर सत्याग्रह की धूम है और इधर हड़तालों का भी कुछ कम ज़ोर नहीं। बड़ी
खुशी इस बात की है कि देश में फिर प्राण जगे हैं और पहले-पहल ही किसानों
और श्रमिकों का युद्ध छिड़ा है। इस बात का भी आने वाले बड़े भारी आन्दोलन
पर असर रहेगा। वास्तव में तो यही लोग हैं कि जिन्हें आज़ादी की ज़रूरत है।
किसान और मज़दूर रोटी चाहते हैं और उनकी रोटी का सवाल तब तक हल नहीं
हो सकता जब तक यहाँ पूर्ण आज़ादी न मिल जाये। वे गोलमेज कॉन्फ्रेंस या अन्य
ऐसी किसी बात पर रुक नहीं सकते। खैर।
आजकल लिलुआ रेलवे वर्कशाप, टाटा की जमशेदपुर मिलों, जमशेदपुर शहर
के भंगियों और बम्बई की कपड़ा-मिलों में हड़ताल हो गयी है। वास्तव में तो
मोटी-मोटी शिकायतें सबकी एक-सी होती हैं। वेतन कम, काम ज़्यादा और
व्यवहार बुरा। इस स्थिति में ग़रीब मज़दूर जैसे-तैसे गुज़ारा करते हैं, लेकिन आख़िर
असहनीय हो जाता है। आज बम्बई में डेढ़-दो लाख व्यक्ति हड़ताल किये बैठे हैं।
सिर्फ़ एक मिल चलती है। बात यह कि नये हथकरघे आये हैं, जिनमें एक आदमी
को दो हथकरघों पर काम करना पड़ता है और मेहनत ज़्यादा करनी पड़ती है। यही
काम करने वालों का वेतन ख़ासतौर से बढ़ाने, बाक़ी आम मज़दूरों का वेतन बढ़ाने
और 8 घण्टे से अधिक काम न ले सकने और कुछ व्यवहार सम्बन्धी शर्तें पेश
की गयी हैं। इस समय हड़ताल का बड़ा ज़ोर है। जमशेदपुर मिल के श्रमिकों की
भी कुछ ऐसी ही माँगें हैं। वहाँ भी हड़ताल बढ़ती जा रही है। भंगी अपनी हड़ताल
किये हुए हैं और शहर की नाक में दम हुआ है। सबसे अधिक सेवा करने वाले
भाइयों को हम भंगी-भंगी कहकर पास न फटकने दें और उनकी ग़रीबी का लाभ
विविध सामाजिक-राजनीतिक प्रश्न : कुशाग्र विश्लेषक दृष्टि / 255