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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 260, कुल 788 में से

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पृष्ठ 260

कर दिया, लेकिन दो महीने बाद सरकार ने सिर झुका दिया और ज़मींदारों
(?) की शर्त मान ली।
दूसरी बार जब महात्मा जी 1923-24 में जेल में थे तब सत्याग्रह हुआ। पहली
बार 600 गाँवों ने हिस्सा लिया था। इस बार 94 गाँवों का लगान बढ़ाया और इन
गाँवों ने सत्याग्रह किया। उन पर ताजीरी टैक्स लगाया गया था। वहाँ नियम था कि
सूर्यास्त होने पर जायदाद कुर्क नहीं हो सकती थी और किसान सवेरे ही
अपने-अपने घरों को ताले लगाकर चले जाते और पुलिस को कोई गवाह तक न
मिलता। अधिक तंग आकर सरकार ने टैक्स वापस ले लिया। इस बार बारदोली
में सत्याग्रह शुरू हुआ है। बारदोली में 1921-22 में आज़ादी के लिए बड़ा भारी
सत्याग्रह करने की तैयारियाँ की गयी थीं। सब क़िस्मत के खेल! बना-बनाया खेल
बिगड़ गया। खैर, उन पिछली बातों का क्या करना। अब उस इलाके का बन्दोबस्त
सरकार ने किया। बेचारे किसानों की मुसीबत, अच्छा बन्दोबस्त हुआ, 22 प्रतिशत
लगान बढ़ गया! बहुत कहा गया लेकिन सरकार कब मानती है। श्री बल्लभभाई
पटेल के नेतृत्व में काम शुरू हो गया और किसानों ने लगान देने से मना कर दिया।
अब ज़ब्ती अधिकारी और सारे ही अफ़सर बारदोली ताल्लुके की ओर इकट्ठा हुए
हैं। जो उनसे हो सकता है, लोगों को ग़लत रास्ते पर डालने के लिए कर रहे हैं।
जायदाद ज़ब्त की जा रही है, ज़मीनें ज़ब्त करने के हुक्म जारी हो रहे हैं। लेकिन
माल, सामान उठाने के लिए आदमी नहीं मिलते। इस समय काम वहाँ ज़ोरों पर
है, लेकिन एक मजे की बात यह है कि सारा काम बड़ी शान्ति से हो रहा है। वे
अफ़सर जो लोगों को तंग करने आये थे, उनके साथ बड़े प्यार का व्यवहार किया
जाता है। पहले उन्हें रोटी-पानी नहीं मिलता था, अब पटेल ने कहा कि उन्हें रोटी-
पानी ज़रूर दे दिया करो। एक दिन शराब की दुकान से चार टिन कुर्क किये गये,
लेकिन उठाने वाला कोई न मिला। जब अधिकारी ने कहा, 'बड़ी प्यास लगी है,
पानी तो दो,' तो झट एक सेवादार सत्याग्रही ने सोडे की बोतल लाकर पिलायी।
इस तरह काम बड़े ज़ोरों से, पूरी शान्ति से चल रहा है। बड़ी उम्मीद है कि सरकार
को अधिक झुकना पड़ेगा।
दूसरी जगह कानपुर है जहाँ सत्याग्रह होने वाला है। पिछले दिनों कानपुर में
हिन्दू-मुस्लिम दंगे हुए। बाद में ताजीरी पुलिस बिठायी गयी। कुछ दिन हुए कि
कानपुर के कौंसिल सदस्य श्री गणेशशंकर जी विद्यार्थी सम्पादक 'प्रताप', कानपुर
को एक पत्र मजिस्ट्रेट से मिला कि अपने दफ़्तर के सभी कर्मचारियों की सूची
और उनका वेतन या पद लिखकर भेजें, क्योंकि तारी ताजीरी टैक्स वसूल किया
जाना है। लेकिन विद्यार्थी जी ने लिख भेजा कि मैं कोई टैक्स देने को तैयार नहीं
हूँ और न ही इस काम में कोई सहायता ही करूँगा, क्योंकि दंगा पुलिस ने करवाया
था। हमें उसका दण्ड नहीं मिलना चाहिए। लोगों ने विद्यार्थी जी से पूछा कि हम
254 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़